Friday, August 13, 2010

अंतिम ..सफ़र


मन क्यों अशांत सा है
संतुष्टि का भान क्यों नहीं है
जल रहा दीया
फिर पतंगा ही परेशान सा क्यों है
भागा था वो अँधेरे से डर कर
क्या मिला रोशनी में आ कर

क्यों आँखे सूज रही है
रोते रोते आज
क्यों हो रही है
किरणे मैली सी आज
हम किस को अपनी
कविताये सुनाये
सपनो के ताज महल
अब किसके लिए बनाये

इश्क की राहो में
वो चले नहीं
दिल की पथरीली
ज़मी पे वो ढले नहीं

अब वो एक खिड़की नहीं
जिस में फिर बसर हो
बोलिए हमसे अंतिम
सफ़र कैसे हो ........कैसे हो ?????
कृति ............अंजु (अनु)

Friday, August 6, 2010

मेरे मालिक........


मन क्यों अशांत सा है
संतुष्टि का भान क्यों नहीं है
जल रहा दीया
फिर पतंगा ही परेशान सा क्यों है
भागा था वो अँधेरे से डर कर
पर क्या मिला रोशनी में आ कर उसे

क्यों आँखे सूज रही है
रोते रोते आज
क्यों हो रही है
किरणे मैली सी आज
क्यों शब्दों में है अपमान की भाषा
विचारो कि शुद्दता कहाँ खो सी गई है

आज तो सब वाकया ही बदल गया
क्यों आज अपनी ही बेटियां
एक बाप के लिए बोझ हो गई
क्यों एक मकान घर मे बदल गया
क्यों सारे शहर का मिजाज़ बदल गया
सुना था घर के चिराग से घर जल गया
पर यहाँ तो बड़ो की खुदगर्जी का साया
हम बेटियों पर भी पड़ गया

मेरे मालिक........
तुझ से है इति सी बिनती मेरी
मुझे इंसान बना रहने दो
बनी रहे मेरे दिल में ममता की मूरत
तेरे जहाँ को प्यार कर सकूं
बस इतनी रहमत करना ।

कृति अंजु..(.अनु )

Sunday, July 25, 2010

मोहब्बत..............

तेरे दामन से यू लिपटे है हम कि
ख्याबो के मंज़र भी छोटे नज़र आने लगे हैं ||

दिल की दुनिया को यू सज़ा बैठे है हम तेरे संग कि
भरी महफ़िल में भी खुद को तनहा पाने लगे है हम ||

दुनिया की गुज़रती भीड़ का हिस्सा तो बन गए है हम
पर क्यों ये कदम तुम्हारी तरफ ही बढने लगे हैं ||

नज़र नहीं आता काफिला यारे बहारो का हम को
हम तो अब तेरे साये में ही सिमट कर गुज़र करने लगे हैं ||

आता नहीं है हम को समुद्र की आगोश में छिप के रहना
पर क्या करे तेरे प्यार की गहराई में डूब कर गोते लगाने लगे हैं ||

नहीं मांगी है तुझे से तेरे ख्यालो की दुनिया हम ने
हम तो अपने ही सपनो में तुमसे पनहा मांगने लगे है ||

किया प्यार जो तुमने मुझे खुद से ज्यादा
इजाज़त है ज़िन्दगी से हमको मोहब्बत है तुमसे ||
(((कृति अंजु..((((अनु)))

Sunday, May 16, 2010


नजदीकियां


कैसे है ये दिलो के फांसले , जो नजदीकियां को बढाते हैं ;
जिंदगी के इस मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा ,
रहा कि वीरानियो को जैसे मिल गया हो सहारा तुम्हारा
जिनता दूर होते हैं वो ,उतना ही हमको पास नज़र आते हैं
वो एक प्यार भरा दिल था .जिसे समझने के बाद हम दीवाने हो गए है
वो भी इक प्यार भरी नज़र ही थी ,जिसने मेरे रूप को साकार किया है
ज़िन्दगी के इस मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा ,
राह की वीरानियों को जैसे मिल गया हो सहारा तुम्हारा |
तारो से भरा आसमां ,नहा गया चाँद कि चांदनी से
फूलो से भरी डालियाँ भी ,झुक गयी तुम्हारे सत्कार में
ऐसा खिला है अपना रिश्ता कुछ तुम्हारा कुछ हमारा,
कि तुमको खोजती हूँ, मै चाँद की परछाईयों में ,
बाट तकती हूँ मै तुम्हारी रात की तन्हाइयों में ,
आज मेरी कामनाओं ने तुम्हे कितना है पुकारा,
ऐसी हे कुछ खिला हुआ रिश्ता , कुछ तुम्हारा कुछ हमारा,
ज़िन्दगी के इस मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा ||||
(((कृति ..अंजु चौधरी ..(अनु))))