Wednesday, November 13, 2013

आप सब आमंत्रित हैं

हम गुलमोहर के रचनाकर
अपनी खुशियों में करना चाहते हैं
आपको शामिल .....
चाहते हैं आपकी शुभकामनाएँ
आपकी गरिमामय उपस्थिति
आप सबका प्रदीप्त सान्निध्य।
तो आएँगे न ...
जरूर आइएगा
इंतज़ार करेंगे हम सब.......

30 कवियों की प्रतिनिधि कविताओं के संग्रह "गुलमोहर"
का विमोचन

सान्निध्य :
लीलाधर मंडलोई, वरिष्ठ कवि
सुमन केशरी अग्रवाल, वरिष्ठ कवयित्री
लक्ष्मी शंकर वाजपेई, वरिष्ठ कवि-गीतकार
ओम निश्चल, वरिष्ठ कवि-लेखक
मनीषा कुलश्रेष्ठ, चर्चित कहानीकार

स्थान : हिंदी भवन, आईटीओ के पास
तृतीय तल
विष्णु दिगम्बर मार्ग

दिन : 16 नवम्बर 2013
समय : दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक


गुलमोहर के प्रतिभागी रचनाकार :

अपर्णा अनेकवर्णा
अरुण शर्मा अनंत
अशोक अरोड़ा
आभा खरे
अनुराग त्रिवेदी
नीलिमा शर्मा
शलिनी रस्तोगी
किशोर खोरेन्द्र
रंजू भाटिया
बोधमिता
उपासना सियाग
नीलू पटनी
दिवेन्द्र सिंह
दीपक शुक्ला
ऋता शेखर
संध्या जैन
महिमा मित्तल
सत्यम शिवम
हुकम चंद भास्कर
गुंजन श्रीवास्तव
नितीश मिश्रा
हरी शर्मा
विवेक अरोरा
भरत तिवारी
राज रंजन
कुमार जेमिनी शास्त्री
पवन अरोड़ा
अंजु चौधरी
मुकेश कुमार सिन्हा
 
 
अंजु(अनु) चौधरी 

Saturday, October 19, 2013

डायरी के पन्नों की एक सोच …




हमारे बुज़ुर्ग लोग कहते हैं कि बेटी धान की खेती की तरह होती है |वह परायाधन या किसी दूसरे की अमानत भी कहलाती है |अपने हिस्से की धूप और छाँव को सहती हुई ये बच्चियाँ ना जाने कब बडी हो कर किसी ओर घर की शोभा बन कर अपने माँ-बाबा की दहलीज़ को छोड़ , दूसरे घर को कितनी सरलता से अपना मान लेती हैं |
आँगन में बचपन की डगमग चाल, ना जाने कब सीढियों और बंद कमरों की यादों में विदा ले कर गुम हो जाती हैं |कुंवारे सपनों ने करवट ली, पिया के द्वार से बुलावा आया नहीं कि बाबा की दुलारी और माँ की लाडो कितने ही हसीन सपनों के साथ एक नए घर में प्रवेश करने को तैयार हो जाती है |

 (पूरा पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ......http://kshitijaa.com/http://kshitijaa.com/storys/%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%9A )

Saturday, October 5, 2013

राम तेरे देश में



राम तेरे देश में.......(पूरी कविता पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे)
राम तेरे देश में
क्यों मची हुई है लूट ?
सत्य अहिंसा छोड़कर,
डाल रहे हैं सब फूट

हर जगह लुट रही है नारी,
हो रही अस्मतों की लूट......

Thursday, September 19, 2013

राष्ट्रीय साहित्य,कला और संस्कृति का सम्मान समारोह

 आज की पोस्ट में मैं आप से पहले अपने सम्मान की कुछ तस्वीर साँझा करुँगी और उसके बाद उदयपुर जो मैंने अपनी नज़र से देखा ...एक भ्रमण और एक सोच के साथ कि मैं इस सफर में कुछ भी सोच कर नहीं चली  थी ...बस एक सम्मान लेने की बात थी जो कि मुझे मिलना था और मुझे उसे लेकर वापिस आ जाना था पर नहीं जानती थी कि ये सफर एक यादगार सफर के रूप में मेरी इस जिंदगी के साथ जुड़ जाएगा ....
उदयपुर से लगभग ३८ km उत्तर की तरफ जाने वाले सड़क मार्ग पर महाराणा प्रताप संग्रहालय ...हल्दीघाटी स्थित है |पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इसका नाम बहुत सम्मानपूर्वक लिया जाता है |
**************
लेखन के क्षेत्र में एक कदम और आगे .......राष्ट्रीय साहित्य,कला और संस्कृति परिषद्...महाराणा प्रताप संग्रहालय, हल्दीघाटी, राजसमन्द (राज.)...(उदयपुर )
 





सम्मान पुरस्कार पत्र .....श्रीमती अंजु (अनु) चौधरी काव्य शिरोमणि राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित ...१४ सितम्बर ...२०१३ 


 


मुझे सम्मान देने वालो में ...डॉ अमर सिंह वधान (चंडीगढ़ ), हरकीरत जी (गुहाटी से) और डॉ देवेन्द्रनाथ साह (विक्रमशिला विद्द्यापीठ)...
कुछ लोगों  और कुछ दोस्तों से मिलना हमेशा ही एक सुखद अहसास की अनुभूति देता है और इस लिस्ट में हर बार कोई ना कोई नाम जुड़ जाता है ...इसे मैं एक इतेफाक ही कहूंगी कि मेरे प्रथम काव्यसंग्रह ''क्षितिजा'' का विमोचन हरकीरत जी के संग्रह के साथ ही हुआ था और मेरी उनसे ये दूसरी मुलाकात थी |यूँ अचानक से उनसे मिलना हो जाएगा ..ये मैं जानती नहीं थी |
********************************



                                               आशा पांडेय ओझा और मैं(कुछ बातचीत के क्षण )
फेसबुक की एक ओर मित्र जो अभी तक बस वहीँ तक ही सीमित थी उनसे ऐसे आमने सामने मिलना अच्छा लगा ....''आशा पांडेय ओझा '' जिन्हें फेसबुक पर पढ़ा और देखा था उनसे इस तरह मिलना ...अच्छा लगा ..मेरी ही तरह वो भी इस संस्था द्वारा सम्मानित की गई थी |
                                         

***********************

 देश भर से आए सभी सम्मानित सदस्यों का जमावड़ा  ......सभागार पूरा भरा हुआ था



                                          मैं ..डॉ डॉ देवेन्द्रनाथ साह (विक्रमशिला विद्द्यापीठ)...और डॉ सुमन भाई ''मानस भूषण ''
 डॉ सुमन भाई''मानस भूषण'' ..इनकी श्रीमती जी(उज्जैन से) और मैं
************************

 डॉ सुरिंदर कौर जी(जालंधर से ) ,डॉ अमर सिंह वधान (चंदीगढ़) और हम (अंजु(अनु) चौधरी करनाल से


यहाँ  हल्दीघाटी (उदयपुर)में अपने देश के अलग अलग जगह से बहुत सारे साहित्यकार आए हुए थे ...ऐसा लग रहा था जैसे पूरा हिन्दुस्तान यही सिमट गया हो ....सब से मुलाकात संम्भव नहीं थी ...पर जिन से मुलाकात हुई उनके परिचय और बेहद संजीदा बातचीत के साथ और ये मेरे साथ मुंबई की मेरी दोस्त नीता कोटेचा ...जो मेरे इस सफर की साक्षी भी है और इस प्रोग्राम को कमरे में कैद करने वाली मेरी शुभ-चिन्तक मित्र
 ******************************
महाराणा  प्रताप संग्राहलय का बाहरी हिस्सा ....उस वक्त की  बेजोड कारीगरी

 संग्राहलय के प्रांगनमें शिव मंदिर ....बेहद खूबसूरत

संग्राहलय  का बाहरी द्वार पर आने वालो के लिए मनोरंजन का पूरा बंदोबस्त है ...कुछ मस्ती के पल नीता और मेरे लिए ये पल बेहद खूबसूरत अहसास लिए हुए रहें ...

                                  

http://www.haldighatimuseum.com/..............महाराणा प्रताप संग्राहलय ...(हल्दीघाटी) का बाहर से दिखने वाला सम्पूर्ण रूप आप इस साईट पर देख सकते हैं

उदयपुर जितना हमने देखा ....वो अगली पोस्ट में आप सबके साथ साँझा करुँगी ......