Saturday, June 11, 2011

इश्क चला है हुस्न से मिलने.........

चित्र आभार ....रोज़ी सचदेवा





इश्क चला है हुस्न से मिलने.........

चांदनी रात के साये में
चाँद की भीगी चांदनी में
इश्क बोला हुस्न से
ले कर हाथो में हाथ चलो
यूँ ही चलते चलते
उम्र भर साथ चलो
मेरी आस से बंधी है
आशा की डोर और
उमंगो की पतंग
रात की शीतलता में
डूब जायेगे हम तुझ संग
एहसास की नगरी में
लिए यूँ ही शर्मीली मुस्कान
तुम चलो मेरे द्वार..
संग लिए फूलों का हार चलो ..............
चांदनी रात के साये में ............

बढते चले जाएगें
उभरते चले जाएगें
ये मन गा रहा है
प्रेम गीत ...वो यूँ ही
गाते चले जाएगें
क्यों हम डोलने लगे है
आशा और अभिलाषा
की बोली में
हम तो यूँ ही
गलबहियां डाले मिलेगे
अपनी ही नई नई
देहलीज़ पर
खुशियों का एक
आशियाना बनायेगे
चाँद की ज़मी पर
डूब जायेगे हम ...
धड़कने खलेंगी हमारी ..
जुबा चुप हो जाएगी
दिल का राग सुनेगे हम
नयनो की भाषा की
होगी जीत
जो भरेगी हमारी
ख़ामोशी में भी संगीत
मै सितारों से तेरी
मांग भरूँगा
दूंगा हुकुम चाँद को
कि नाम बदल
ले वो अपना
ये खामोश निगाहें
इशारो से तुझे बुलाएंगी
अंजुमन महक उठेगा अपना
जब ..
इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
चांदनी रात के साये में ........

(अनु..)

54 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत कल्पना ..

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

लाजवाब है एक एक शब्द.

सादर

संजय भास्‍कर said...

बहुत खूबसूरत कविता हैँ ।
मन के एहसासोँ की अच्छी अभिव्यक्ति हुई हैँ। आभार अनु दी ।

Rachana said...

दूंगा हुकुम चाँद को
कि नाम बदल
ले वो अपना
ये खामोश निगाहें
इशारो से तुझे बुलाएंगी
अंजुमन महक उठेगा अपना
जब ..
इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
चांदनी रात के साये में ........
sunder pyari soch
rachana

amit kumar srivastava said...

यूसुफ़ का जज़्बे इश्क ,ज़ुलेखा का जज़्बे हुस्न
कि आना पड़ा पलट के दोबारा शबाब को ।

Anonymous said...

wah anu ji accha hai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर रचना!

प्रवीण आर्य said...

किसी शायर ने कहा है,
हर रात ने वादा किया था साथ निभाने का |
और सुबह होने तक रंग बदल दिया ||

वाह वाह भाभी वाह- प्रवीण आर्य

Mahesh Barmate "Maahi" said...

bahut sundar bhaav...
dhanyawad

रश्मि प्रभा... said...

ishq aur husn ka milan hamesha swargik hota hai... anupam bhaw

Vichar Kranti said...

धड़कने खलेंगी हमारी ..
जुबा चुप हो जाएगी
दिल का राग सुनेगे हम
नयनो की भाषा की
होगी जीत
जो भरेगी हमारी
ख़ामोशी में भी संगीत

और

ये खामोश निगाहें
इशारो से तुझे बुलाएंगी

अनु जी बहुत ही सुन्दर रचना हे सच कहू तो इस रचना के लिये मेरे पास शब्द नहीं हे
आप का बहुत बहुत धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना लिखने के लिये

Vichar Kranti said...

धड़कने खलेंगी हमारी ..
जुबा चुप हो जाएगी
दिल का राग सुनेगे हम
नयनो की भाषा की
होगी जीत
जो भरेगी हमारी
ख़ामोशी में भी संगीत

और

ये खामोश निगाहें
इशारो से तुझे बुलाएंगी

अनु जी बहुत ही सुन्दर रचना हे सच कहू तो इस रचना के लिये मेरे पास शब्द नहीं हे
आप का बहुत बहुत धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना लिखने के लिये

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


खास चिट्ठे .. आपके लिए ...

अजय कुमार said...

खूबसूरत जज्बात

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत और शानदार कविता है! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
चांदनी रात के साये में ........

अनु जी,
क्या खूबसूरत रचना लिखि है आपने!

Kailash Sharma said...

बहुत खूबसूरत रचना...

Jyoti Mishra said...

I'll say
Mazza aa gaya !!!!

vandan gupta said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (13-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

पंकज "प्रेम" said...

Prem ko jis khoobsurti ke sath apne ish kavita ke jariye abhivyakt kiya hai..wo prasansniye hai..

aasha karta hu ki aapki dil ke taro ko chhuti hue rachnaye hame aage bhi padhne ko milegiii

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच[12-6-11]

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

वाह! लाजवाब अभिव्यक्ति भावनाओ की।

आभार

अजय कुमार झा said...

वाह इतना खूबसूरत और इतना रोमांटिक , बहुत ही सुंदर रचना जी । शुभकामनाएं

shikha varshney said...

बेहद खूबसूरत एहसास .सुन्दर रचना.

Rajiv said...

अनु ,तुम्हारी कविता बहुत ही सुन्दर है .कोमल भावनाओं से सजी यह रचना श्रृंगारिक कवियों कि रचनाओं की याद दिलाती है.भाव पक्ष बहुत ही प्रभावशाली बन पड़ा है.

राजीव तनेजा said...

रुमानियत को अपने में समेटे खूबसूरत रचना

Anju (Anu) Chaudhary said...

आप सब का मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया

Anju (Anu) Chaudhary said...

संगीता स्वरुप ( गीत ) जी .......वंदना जी .....और दिलबाग जी आप तीनो का भी बहुत बहुत शुक्रिया मेरे चयन के लिए

kavita verma said...

behad hansin kalpana.....sunder rachna...

udaya veer singh said...

क्या बात है..... ,बड्डे जिगरा दी गल है . इन्ना सोणा अहसास .
शुक्रिया जी ../

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

ख़ूबसूरत रचना

अरुण चन्द्र रॉय said...

हुस्न और इश्क के बीच द्वन्द तो सदियों पुराना है... इस द्वन्द को नए सन्दर्भ में नए अंदाज़ में प्रस्तुत किया है अनु जी आपने... कविता बेहद रोमांटिक है और नदी सा प्रवाह है इसमें... एक खूबसूरत नज़्म के लिए आपको शुभकामना...

Manpreet Kaur said...

वह बहुत अच्छी रचना है ! मज्जा आ गया !मेरे ब्लॉग पर अपना सहयोग दे !
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दिगम्बर नासवा said...

हुस्न और इश्क .. दोनो का साथ चोली दामन का है .... बहुत खूबसूरत शब्दों में उतारा है ...

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की किसी पोस्ट की कल होगी हलचल...
नयी-पुरानी हलचल

धन्यवाद!

सुधाकल्प said...

अति सुन्दर कोमल भावनाओं की अभिव्यक्ति ।
सुधा भार्गव

Anonymous said...

भावमय करती शब्‍द रचना ।

रेखा said...

खूबसूरत रचना

sumeet "satya" said...

बहुत खूबसूरत नज्म

Udan Tashtari said...

सुन्दर रचना और बहुत उम्दा भाव!!

Amrita Tanmay said...

सुन्दर रचना के लिये बहुत बहुत धन्यवाद!

Manoranjan Manu Shrivastav said...

बिलकुल सही कहा, एक के बगैर दुसरे की कल्पना नहीं की जा सकती है .
--------------------------------------------
क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?

बाबा का अनशन टुटा !

ashish said...

सुँदर भाव प्रवण अभिव्यक्ति.

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बहुत सुंदर .......

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

रूमानी जज्‍बों की शानदार प्रस्‍तुति।

---------
ये शानदार मौका...
यहाँ खुदा है, वहाँ खुदा है...

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

रूमानी जज्‍बों की शानदार प्रस्‍तुति।

---------
ये शानदार मौका...
यहाँ खुदा है, वहाँ खुदा है...

Pawan Kumar said...

धड़कने खलेंगी हमारी ..
जुबा चुप हो जाएगी
दिल का राग सुनेगे हम
नयनो की भाषा की
होगी जीत
जो भरेगी हमारी
ख़ामोशी में भी संगीतबहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

यह कविता भी अच्छी बन पड़ी है.बहुत बोलती तस्वीर है

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर... क्या बात है

Anju (Anu) Chaudhary said...

मेरे ब्लॉग पर आने वाले हर दोस्त का दिल से शुर्किया ....मेरी कविता को पढने और उसकी तारीफ़ ले किये

Kunwar Kusumesh said...

इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
चांदनी रात के साये में ........

बहुत खूब.

palak said...

ek ek shabd, dil me apni jagah bna gya......bot badiya.....its one of ur bestst poem chachi !
keep up the gud work.

अभिषेक मिश्र said...

सुन्दर तस्वीर के साथ बेहतरीन रचना.

Maheshwari kaneri said...

इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
चांदनी रात के साये में ........बहुत सुंदर.

Unknown said...

chandni raat ho apne ka saath ho ye sab kitna achchha lagta hai anu ji.