Friday, October 7, 2011


एक ग़ज़ल .....

खुद को खोया भी नहीं,तुमको पाया भी नहीं कभी
फिर साथ तुम्हारा ,अब कैसे मेरा अपना होगा ||

हमने हर गम से निखारी है यादे ,दिनो दिन तुम्हारी ,
तू ही बता कि ,मेरी बगावत का आखिरी रास्ता क्या होगा ||

तुमको पाते तो उसी मदहोशी में ,हम फ़ना हो जाते ....
हम नजदीकी से भी डरते रहे और ,दूरी भी ना बना पाए कभी ||

लोग कहते है कि ,पल भर में होगा सवेरा होगा अभी

पर सूरज को भी तो काली घटायों ने, घेरा होगा कभी ||

सुबह
की शिखायों पर ,उतरती है उषा की लाली
कौन जाने की ये लाली, अनिष्ट है मेरी किस्मत की||


घेरा हुआ है कुदरत के तूफानों ने, इस संसार को

कौन जाने की कभी मेरा भी कोई नया ,सवेरा भी होगा||

क्या मुमकिन है की तूफ़ान के ,दब जाने पर भी ,
मेरा इश्क भी एक नये रूप में, मेरा ही होगा ????

अनु...

32 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

वाह क्या कहने,,
घेरा हुआ है कुदरत के तूफानों ने इस संसार को
कौन जाने कभी मेरा नया सवेरा भी होगा

बहुत सुंदर

SAJAN.AAWARA said...

bahut pyari rachna likhi hai mam apne ....
bahut dino se swasthy sahi nahi tha isliye blog ko time nahi de paya.........
jai hind jai bharat

SAJAN.AAWARA said...

happy dashara

Maheshwari kaneri said...

.सुन्दर भाव बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

36solutions said...

सभी शेर अपने अलग अलग रूपों में, परिपूर्ण. अपने विविध अर्थों में भी एक मूल भाव की ओर बढ़ते शब्‍द.. पाठकों से प्रश्‍न करते हुए से.
सुन्‍दर.

रविकर said...

प्रभावशाली प्रस्तुति ||

बहुत-बहुत बधाई ||

शुभ विजया ||

अरुण चन्द्र रॉय said...

सुन्दर कविता...हाँ सूरज भी घिर जाता है काली घेरों में...

sushmaa kumarri said...

बहुत ही उम्दा ग़ज़ल.....

Murari Pareek said...

sundar prastuti

amrendra "amar" said...

मन की पीड़ा से उपजी बहुत मार्मिक, बहुत सुन्दर रचना...

vandan gupta said...

मन की पीडा को दर्शाती मार्मिक रचना

मुकेश कुमार सिन्हा said...

:):) kabhi lagta hai, ham ek jaise hi to hain...mitra bhi aur shabdo ko samajhne ki chesta karne wale bhi...
.
.
.
par achchha lagta hai dekh kar ki tum bahut aage nikal gayee !! tumhara isq to tumhara hi hoga:)
god bless to u Anju!!

रश्मि प्रभा... said...

waah

Kunwar Kusumesh said...

वाह जी,क्या बात है.
खूब लिखा है.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

अच्छे अशआर कहे हैं आपने...
सादर...

daanish said...

मन की भावनाओं को
सुन्दर शब्दावली दी है आपने ...
अति सुन्दर !

अभिषेक मिश्र said...

क्या मुमकिन है कि तूफ़ान के दब जाने पर भी ,
मेरा इश्क भी एक नये रूप में, मेरा ही होगा ????

बेहतरीन रचना.

राजीव तनेजा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

अरे वाह! क्या बात है

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

कल 10/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

मदन शर्मा said...

सरल शब्दों मे गहन भावभिव्यक्ति दी है.....

Subhash Ujjwal said...

Bahut sunder rachna hain

सदा said...

वाह ...बहुत बढि़या।

Pratik Maheshwari said...

खूबसूरत ग़ज़ल!

शकुन्‍तला शर्मा said...

प्रभावशाली प्रस्तुति

Anonymous said...

बहुत ही उम्दा प्रस्तुति ...

V M BECHAIN said...

bdi hi bariki se sath zazbaat piroye h ji aapne. bdhai swikar kre. bahut khoob

संजय भास्‍कर said...

हर लफ्ज़ में गहराई ... वाह !! क्या बात है ..प्रभावशाली प्रस्तुति |

संजय भास्‍कर said...

कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 15 दिनों से ब्लॉग से दूर था
इसी कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका !

shuk-riya said...

अशोक अरोरा.....
सब सुन्दर ही सुन्दर.....बहुत खूब लिख है आप ने ...अनु...
...खुद को खोया भी नहीँ ..तुम को पाया भी..नहीँ...

पर अनु..जी...

किसी को पाना है तो खुद को पहले खोना होगा तुम्हेँ..
प्यार का ये ही तो कायम रखना होगा तुम्हेँ.......

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

beautiful

मेरा मन पंछी सा said...

bahut hi sundar gajal hai