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Thursday, May 31, 2012

अपने लिए

वे
अपने लिए
नारी की
हरेक परत से
गुज़रना चाहते हैं
सकल पदार्थ
प्यार ,
अनुभूतियाँ ,
चमत्कार ,बाज़ार ,
सरंक्षण ,
सभी कुछ
अपनी सांसों में समेट
नारी की
नैसर्गिकता के
त्याग भाव से
चौंकते हैं  

विभिन्न मुद्राओं ,
संदर्भों  में ,
सीमाएं
निश्चित कर चर्चा
समारोह  ,

समागमों से ,
नारी को
अपने में समेट लेना 

चाहते  हैं  |
वे 
अपने लिए .....|
(अनु)
 

( चित्र  गुगल  आभार से )