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Saturday, November 10, 2012

दीवाली और धनतेरस का त्यौहार .....सबके लिए शुभ हो






मेरे  आँगन की रंगोली



अरे सुनो तो
आज ...कोई बात शुरू करने से पहले ..
बात करे दीवाली की
यारो बताओ ,कैसे बात करे दीवाली की |
 

घर ,गली की या हो
बाज़ार और शहर की
पर भूलने वाली कभी ना हो ये मुलाकात
दीवाली की ...
बच्चों संग बाज़ार गए तो
क्या क्या लाए और क्या क्या देखा
ये तो बतलाओ ...
ये तो रूहानी रात है 

दीवाली की ...
कहीं ज़ब्त ना हो ज़ज्बात दीवाली के
जब भी कहीं बात हो
दीवाली की ....
भूलने वाली कभी ना को
किसी से वो मुलाकात
दीवाली की ....
तभी तो ,
अच्छी लगती जीत ,दीवाली की
सुना है बुरी होती है मात
वो भी दीवाली की ...
खूब छूटेंगे पटाखे ,फूलझड़ी
और जब लाइन सजेगी अनारों की
तो यूँ लगे जैसे कोई
बरात निकल रही हो आज रात
तारों की ...
लाखों खुशियों की सौगात
लेकर आई ,ये रात
दीवाली की...
कुछ तो तुम भी बोलो यार मेरे
बच्चों संग ,या दोस्तों की
सजेगी महफ़िल  तुम्हारी ...
बोलो किसके साथ
फिर कैसे गुज़रेगी ये रात तुम्हारी
दीवाली की ...

पर भूलने वाली कभी ना हो ये मुलाकात
दीवाली की ....|



अंजु  (अनु)