Showing posts with label पतंगबाजी. Show all posts
Showing posts with label पतंगबाजी. Show all posts

Friday, January 27, 2012

बसंत के आने पर

                                    

( हरियाणा में पतंग बाज़ी के रूप में ...बसंत पंचमी  मनाई जाती हैं  ) 
बुढ़िया दादी .दोस्त पुराने ,
आँगन ,आँगन में वो छज्जे पुराने
आज नहीं हैं .....
मेरे यहाँ आने  पर |

रोशन सपने देख रहा था
मैं अपनी धुंधली आँखों से ,
था ,वही मोहल्ला ,वही शहर ,पर
यहाँ अब मेरा कोई नहीं था  ....
आज हैं बसंत ...पर मेरा आँगन  
बिन हुड़दंग ,सुना सुना सा हैं |
फिर भी ...
इस बसंत ...हर घर
हँसी ठिठौली नाच रही
यहाँ घर घर के आँगन में
आज भी वो ही शोर हैं ,
हर मुंडेर पर ,
उडती पतंगों का हैं नज़ारा ...
हर किसी के हाथ में डोर हैं
घर की माँ ...आज भी
बनाती हैं ..सबके लिए
वो साधारण सा खाना |
और देखो तो ,बेटा आज भी
दोस्तों संग अपनी ही छत पर
लगाता है महफ़िल ...
पतंग बाज़ी की 
आज भी ....
आई.....बो काटे एएएएएएएए
का शोर हैं छज्जे छज्जे पर ..और
फ़िल्मी गानों का आज भी वैसा ही दौर हैं
आया है बसंत ,
सज धज कर ,
मज़ा लुटाने को ....
 
भवरों  से कर रही तितलियाँ
नैन मटका .....छज्जे छज्जे पर
भाग गया हैं आज भी
सबका डर .....बसंत के आने पर | 
आज भी ...
ये तेरा ख्याल हैं या मेरी तमन्नाएँ 
जो मुझे यहाँ तक खींच के हैं लाई
याद हैं आज भी ...तेरी वो हँसी  
मुस्कुराती तेरी वो आँखे 
जो सिर्फ मुझे देखती थी 
छिप छिप के मेरे छज्जे पे
बसंत के आने पर ||   
अनु