Showing posts with label प्यार-अनुराग. Show all posts
Showing posts with label प्यार-अनुराग. Show all posts

Tuesday, June 11, 2013

कैसे मेल हो



तू पुरब का वासी
मैं पछम की दासी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
 
तू विचारों  का रेला
मैं अनपढ़ गंवार भली
मिले ना अपनी कोई बात
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
 
तू क्षितिज के उस 
पार
मैं लाली हूँ 
नई सुबह की
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
 
तेरा शाही भंडार
मेरे सर गरीबी की मार
है अपना स्तरीय कटाव 
कैसे मेल हो
बोलो तो ||

तेरी दुनिया
चापलूसों से घिरी
मैं खुद में अलबेली सरकार
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
 
तुझ में सागर सा 
उछाल 
मैं शांत झील सी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||

तू चट्टान सा 
ऊँचा 
मैं समतल 
मैदान सी 
कैसे मेल हो 
बोलो तो ||

तू आश्वासन की 
धार 
मैं विश्वास की 
कमान 
कैसे मेल हो 
बोलो तो ||

तू मधुदान का 
प्रतिदान 
मैं अनुराग 
अटल 
कैसे मेल हो 
बोलो तो ||

तू पुरब का वासी
मैं पछम की दासी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
 
अंजु(अनु)