तू पुरब का वासी
मैं पछम की दासी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
मैं पछम की दासी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तू विचारों का रेला
मैं अनपढ़ गंवार भली
मिले ना अपनी कोई बात
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
मैं अनपढ़ गंवार भली
मिले ना अपनी कोई बात
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तू क्षितिज के उस
पार
मैं लाली हूँ
नई सुबह की
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तेरा शाही भंडार
मेरे सर गरीबी की मार
है अपना स्तरीय कटाव
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तेरी दुनिया
चापलूसों से घिरी
मैं खुद में अलबेली सरकार
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
मेरे सर गरीबी की मार
है अपना स्तरीय कटाव
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तेरी दुनिया
चापलूसों से घिरी
मैं खुद में अलबेली सरकार
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तुझ में सागर सा
उछाल
मैं शांत झील सी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तू चट्टान सा
ऊँचा
मैं समतल
मैदान सी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तू आश्वासन की
धार
मैं विश्वास की
कमान
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तू मधुदान का
प्रतिदान
मैं अनुराग
अटल
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
तू पुरब का वासी
मैं पछम की दासी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
मैं पछम की दासी
कैसे मेल हो
बोलो तो ||
अंजु(अनु)
