Saturday, July 27, 2013

हाय ये कुर्सी ! उफ़ ये कुर्सी








हाय ये कुर्सी ! उफ़ ये कुर्सी 
ओ! कुर्सी के निर्माता
एक कुर्सी मुझे भी भिजवा दो
गर्दन और कंधे का
दर्द मिटा दो ||





देखो ना...
इसी कुर्सी के लिए
नेताओं ने
देश के हिस्से
कर डाले
अपनों ने,अपने ही  

मार डालें
उफ़! इस कुर्सी की
महिमा है निराली
जो है आम जनता की
उम्मीदों पर भारी ||

ओ-कुर्सी के निर्माता
ये कुर्सी-लोक है
घूम-फिर कर
सबको यहीं 
है आना 
इस कुर्सी के लिए
हर गठबंधन
बनाया और तोड़ा जाता 
झूठे बयानों का छींका
किसी पर भी
फोड़ा जाता   

सबका सपना है
ये कुर्सी
अब ओर क्या कहूँ 
क्या क्या महिमा
कुर्सी की मैं बतलाऊं   |

हर नेता की आस है
राजनीति की चाल है
ये कुर्सी
 
हत्याधारी, अत्याचारी और
बलत्कारी का बचाव है
ये कुर्सी
कुर्सी की गिरफ्त में
गिरफ्तार हर कोई
उफ़! ये कुर्सी
हाय! ये कुर्सी |


पर,मेरे लिए भी
वरदान है
ये कुर्सी,
काम करने के बाद
कुछ पल आराम के देती है
ये कुर्सी ||


बस
मेरा ये काम करवा दो
दुआ दूंगी
हर वक्त तुम्हें 

इस अनचाहे
दर्द को मिटा दो
ओ-कुर्सी के निर्माता
एक कुर्सी...मुझ को भी                         
भिजवा दो !!!                                                           

            अंजु(अनु)

36 comments:

मुकेश कुमार सिन्हा said...

war re kursi..
manbhavan kursi..
ek mere liye bhi pls...
superb :)))

Anju (Anu) Chaudhary said...

:)))))).......मुकेश जी वैसे भी सरकारी कुर्सी पर हो आप

Bharat said...

awesome....

"नेह्दूत" said...

सब दुखों के साये में है
क्या कविता सुनाये
सारा जहाँ उदासी के साये में
क्या कविता सुनाये
सदा रहते जो राजनीती के रंग में
केवल वही देश के सेवक है;
क्या कविता सुनाये,
बन्ने आये थे जो देश सेवक ,
वही आज कुर्सी की चाह में,
खुद ही लगे है ,
कुर्सी बचने में,
न जाने मध्यावधि कभी भी हो जाये
क्या कविता सुनाये.
-(नेह्दूत)

kavita verma said...

haay ri kursi ..badiya

Anju (Anu) Chaudhary said...

विवेक जी ....मेरी इस कुर्सी का आधार ये नेहदूत ही है

Anju (Anu) Chaudhary said...

भारत ...ये कुर्सी की सोच आपके यहाँ से ही आई है...आप जानते हैं :)))

Anonymous said...

बहुत सुन्दर व्यंग्यात्मक कविता के लिए बधाई... - पंकज त्रिवेदी

मेरा मन पंछी सा said...

कुर्सी की महिमा निराली..
बहुत ही बढ़ियाँ रचना...
:-)

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुत बढ़िया कुर्सी महिमा !
latest post हमारे नेताजी
latest postअनुभूति : वर्षा ऋतु

ताऊ रामपुरिया said...

पर,मेरे लिए भी
वरदान है
ये कुर्सी,
काम करने के बाद
कुछ पल आराम के देती है
ये कुर्सी ||

काश नेता भी इस कुर्सी से सिर्फ़ आप जैसा ही नेह रखते तो आज भारत की ये दुर्दशा ना होती, बहुत ही अर्थपूर्ण कविता.

रामराम.

Dr. Shorya said...

बिलकुल सही कहा अंजू जी आपने, इस कुर्सी के लिए ही सब दीवाने है

Unknown said...

इनके एक ही अरमान
चाहे देश बने श्मशान

मेरी कुर्सी सदा रहे आबाद
जाड़ा-गर्मी या हो बरसात

इन सब की एक ही मांग
हमे जीतावो अब की बार...

अन्जु चौधरी जी,
कुर्सी के उपर बहुत ही सुंदर रचना आपने लिखा है,बहुत बढ़िया.

Pallavi saxena said...

अरे वाह यह तो गज़ब कि कुर्सी है भई...:))एक हमें भी भिजवा दीजिये क्या पता यहाँ लंदन में भी इसका जादू वैसे ही चल जाये जैसे वहाँ चलता रहता है ;)

Dr. sandhya tiwari said...

ab ye kursi virasat me bete sambhal rahe hain aur kuch sambhalne ki taiyari kar rahe hai.....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अपने लिए तो बस आरामदायक ही है कुर्सी .... हाय हाय करने वाले तो नेता ही हैं कुर्सी के लिए । बढ़िया रचना

Tamasha-E-Zindagi said...

हाय रे हाय ये कुर्सी! .... बेहतरीन रचना |

Dr. pratibha sowaty said...

behatareen rachna

Dr. pratibha sowaty said...

behatareen rachna

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज रविवार (28-07-2013) को त्वरित चर्चा डबल मज़ा चर्चा मंच पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Amrita Tanmay said...

हम सबके लिए भी दुआ की जाए कि एक-एक कुर्सी इधर भी..

Maheshwari kaneri said...

किस्साये कुर्सी..बढ़िया..

सारिका मुकेश said...

सांसों की ज़रूरत है जैसे जिंदगी के लिए,
बस एक कुर्सी चाहिए राजनीति के लिए...
और उस कुर्सी के साथ एक टंच माल (आजकल इसकी बहुत चर्चा है ना) हो तो और अच्छा;-))...क्योंकि अक्ल का होना ना होना मायने नहीं रखता ना....;-))

विभा रानी श्रीवास्तव said...

Bahut khub
achchhi bakhiyaa udheri
mazaa aayaa

Rahul said...

अच्छी रचना और सत्य वचन :)

दिगम्बर नासवा said...

बेचारी कुर्सी का नाम इतना बदनाम कर दिया है इन नेताओं ने ... की कुर्सी की बात हो और नेताओं का जिक्र आ जाता है ... सच है ये आम इंसान की जरूरत भी है ... अच्छा व्यंग है ...

mark rai said...

सुंदर रचना.....

संध्या शर्मा said...

सारा झमेला इस कुर्सी का ही है... बहुत बढ़िया अर्थपूर्ण व्यंग

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

हाहाह, बढिया

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ५ रुपये मे भरने का तो पता नहीं खाली हो जाता है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Asha Joglekar said...

किस्सा कुर्सी का ।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

bahut mehngi hai kursi aajkal

Aparna Bose said...

अब देखिये न इस कुर्सी के लिए अमरीका के पास पहुँच गए मदद मांगने

Kailash Sharma said...

बहुत खूब! कुर्सी की महिमा अपरम्पार है...

nayee dunia said...

बहुत अच्छा व्यंग्य है ...

Mahesh Barmate "Maahi" said...

बहुत खूब...