अपने नेताओं में
पहले जैसी बात कहाँ
बिन मांगे मिल जाए इंसाफ
अब वो हालत कहाँ
वक़्त के साथ साज़ बदल रहे
अब वो हालत कहाँ
वक़्त के साथ साज़ बदल रहे
देश में गद्दार बढ़ रहे
हो रही कुर्सी की होड़ यहाँ
अब ईमान की
वैसी रात कहाँ
वैसी रात कहाँ
पहले जैसी बात कहाँ
राज़ की बाते राज़ रही
गँवारो के हाथों
गँवारो के हाथों
हमेशा सरकार रही
इस देश में अब
पहले जैसी बात कहाँ
बुत बने बैठे हैं
सरकारी अफसर और
रहनुमा यहाँ
विषैली राजनीति में
धरणों की भरमार यहाँ
इस देश में अब
पहले जैसी बात कहाँ
बुत बने बैठे हैं
सरकारी अफसर और
रहनुमा यहाँ
विषैली राजनीति में
धरणों की भरमार यहाँ
फिर भी धुल जाते
सारे पाप यहाँ
अब,पहले जैसी बात कहाँ
कैसा ये गणतन्त्र है
कैसी है ये स्वतन्त्रता
लेश मात्र भी किसी नेता को
कोई लज्जा नहीं
ना पाप का अहसास है
ना है आदमी असली
मौत भी बेरंग नहीं
बढ़ रहा छल पल पल यहाँ
अब पहले जैसी बात कहाँ ||
अब,पहले जैसी बात कहाँ
कैसा ये गणतन्त्र है
कैसी है ये स्वतन्त्रता
लेश मात्र भी किसी नेता को
कोई लज्जा नहीं
ना पाप का अहसास है
ना है आदमी असली
मौत भी बेरंग नहीं
बढ़ रहा छल पल पल यहाँ
अब पहले जैसी बात कहाँ ||




