Saturday, August 25, 2012

एक नई भोर



एक नई भोर हुई सी ....

ये दिल भरा भरा सा
इस दुनिया की चालों से
डरा डरा सा ,अनजानी राहों पे
फिर भी कदम बढ़ रहे
मंजिल की ओर |

मुख मद्धम मद्धम
आँखों की चमक है खोई खोई
झुकी झुकी है नज़र
अनहोना ना देखे कुछ 

फिर भी  बेगाने हैं लोग बहुत |

हां ,दूर कहीं एक आस
जगी जगी सी
उम्मीदों की किरणे हैं
फैली फैली सी
उसकी इक रोशनी मुझे
अपनी ओर खींचती हुई सी |

अब ये दो नयना भरे भरे से
एक  विश्वास की डोर से
बंधे बंधे से
एक नई भोर की लाली
अभी अभी उभरी सी

 इक नई मंजिल की ओर
कदम  बढ़े बढ़े से ||

अंजु (अनु)

41 comments:

  1. बहुत ही बेहतरीन रचना......

    ReplyDelete
  2. बेहद खूबसूरत रचना...चित्र भी सुंदर लगाया है !!

    ReplyDelete
  3. इक नई मंजिल की ओर
    कदम बढ़े बढ़े से ||


    bahuut badhiya..badhte raho hamari duaa tumhare sath hai.. na daro kisise na gabhrao kisise bas badhe chalo badhe chalo... :)

    ReplyDelete
  4. बहुत -बहुत सुन्दर रचना...
    :-)

    ReplyDelete

  5. Saturday, August 25, 2012
    एक नई भोर



    एक नई भोर हुई सी ....

    ये दिल भरा भरा सा
    इस दुनिया की चालों से
    डरा डरा सा ,अनजानी राहों पे
    फिर भी कदम बढ़ रहे
    मंजिल की ओर |

    मुख मद्धम मद्धम
    आँखों की चमक है खोई खोई
    झुकी झुकी है नज़र
    अनहोना ना देखे कुछ
    फिर भी बेगाने "है" लोग बहुत |बढ़िया प्रस्तुति ....फिर भी बे -गाने "हैं "लोग ...अनुस्वार /अनुनासिक /बिंदु /चन्द्र बिंदु "है" लोग इसलिए हैं आयेगा ,बहु -वचन हैं लोग .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    शनिवार, 25 अगस्त 2012
    आखिरकार सियाटिका से भी राहत मिल जाती है .घबराइये नहीं .
    गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)

    ReplyDelete
  6. बेहद खूबसूरत रचना...

    ReplyDelete
  7. अब ये दो नयना भरे भरे से
    एक विश्वास की डोर से
    बंधे बंधे से
    beautiful lines with emotions and feeligs.

    ReplyDelete
  8. स्वयं पर विश्वास हो तो कदम दृढ़ता से मंज़िल की ओर बढ़ते हैं .... सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  9. अँधेरे की आहट ने
    खोल दी हैं खिड़कियाँ
    सूरज की किरणों से फैला उजाला है
    नया सवेरा तुम्हारा है

    ReplyDelete
  10. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 29/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
  11. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 29/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
  12. विश्वास की डोर से बंधे जीवन के पथ पर आगे बढ़ते जाना है..बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता..

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्दर रचना...इक नई मंजिल की ओर
    कदम बढ़े बढ़े से ||

    ReplyDelete
  14. ओह
    बहुत सुंदर रचना
    क्या बात

    ReplyDelete
  15. bahut sundar kavita...positive thought kay saath.........

    ReplyDelete
  16. सुंदर अभिव्यक्ति....

    ReplyDelete
  17. बेहतरीन रचना

    ReplyDelete
  18. बेहतरीन रचना ....

    ReplyDelete
  19. बहुत ही खूब...
    आपने मनोभाओं को बड़ी सहजता से बटोरकर एक शानदार रचना का रूप दिया हैं|

    मेरा ब्लॉग आपके इंतजार में,समय मिलें तो बस एक झलक-"मन के कोने से..."
    आभार...|

    ReplyDelete
  20. बेहतरीन प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  21. bahut hi sundar rachana lagi anju ji ....sadar badhai sweekaren

    ReplyDelete
  22. मंजिलों की ओर अग्रसर रहें और सफलता पाते रहें..... शुभकामनाएं
    बहुत सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  23. हां ,दूर कहीं एक आस
    जगी जगी सी
    उम्मीदों की किरणे हैं
    फैली फैली सी
    उसकी इक रोशनी मुझे
    अपनी ओर खींचती हुई सी |
    बहुत सुन्दर बात कही है आपने.तुम मुझको क्या दे पाओगे ?

    ReplyDelete
  24. हां ,दूर कहीं एक आस
    जगी जगी सी
    उम्मीदों की किरणे हैं
    फैली फैली सी
    उसकी इक रोशनी मुझे
    अपनी ओर खींचती हुई सी |
    बहुत सुन्दर बात कही है आपने.तुम मुझको क्या दे पाओगे ?

    ReplyDelete
  25. बहुत सुन्दर सृजन , सादर

    पधारें मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" पर भी , आभारी होऊंगा .

    ReplyDelete
  26. कदम बढते रहना जरूरी है ... मंजिल पास आती जाती है ... मिल ही जाती है ... आशा का संचार है ये रचना ...

    ReplyDelete
  27. एक नई भोर की लाली
    अभी अभी उभरी सी
    इक नई मंजिल की ओर
    कदम बढ़े बढ़े से ||

    बेहतरीन रचना , प्रेरित करती हुई.
    शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  28. pahli baar aapke blog par aana hua bahut hi khoosurat rachna..

    ReplyDelete
  29. और ये कदम अनवरत बढ़ाते ही रहें ....!!
    शुभकामनायें ....

    ReplyDelete
  30. अब ये दो नयना भरे भरे से
    एक विश्वास की डोर से
    बंधे बंधे से
    एक नई भोर की लाली
    अभी अभी उभरी सी
    इक नई मंजिल की ओर
    कदम बढ़े बढ़े से ||
    sunder bhav badhai
    rachana srivastava

    ReplyDelete
  31. anju ji bahut hi sundar rachana likhi hai apne sadar badhai .

    ReplyDelete
  32. आशा बंधाती हौसला दिलाती कविता ।

    ReplyDelete