एक नई भोर हुई सी ....
ये दिल भरा भरा सा
इस दुनिया की चालों से
डरा डरा सा ,अनजानी राहों पे
फिर भी कदम बढ़ रहे
मंजिल की ओर |
मुख मद्धम मद्धम
आँखों की चमक है खोई खोई
झुकी झुकी है नज़र
अनहोना ना देखे कुछ
फिर भी बेगाने हैं लोग बहुत |
हां ,दूर कहीं एक आस
जगी जगी सी
उम्मीदों की किरणे हैं
फैली फैली सी
उसकी इक रोशनी मुझे
अपनी ओर खींचती हुई सी |
अब ये दो नयना भरे भरे से
एक विश्वास की डोर से
बंधे बंधे से
एक नई भोर की लाली
अभी अभी उभरी सी
इक नई मंजिल की ओर
कदम बढ़े बढ़े से ||
अंजु (अनु)

बहुत ही बेहतरीन रचना......
ReplyDeleteबेहद खूबसूरत रचना...चित्र भी सुंदर लगाया है !!
ReplyDeletenice poetry
ReplyDeletenice very nice
ReplyDeleteइक नई मंजिल की ओर
ReplyDeleteकदम बढ़े बढ़े से ||
bahuut badhiya..badhte raho hamari duaa tumhare sath hai.. na daro kisise na gabhrao kisise bas badhe chalo badhe chalo... :)
बहुत -बहुत सुन्दर रचना...
ReplyDelete:-)
ReplyDeleteSaturday, August 25, 2012
एक नई भोर
एक नई भोर हुई सी ....
ये दिल भरा भरा सा
इस दुनिया की चालों से
डरा डरा सा ,अनजानी राहों पे
फिर भी कदम बढ़ रहे
मंजिल की ओर |
मुख मद्धम मद्धम
आँखों की चमक है खोई खोई
झुकी झुकी है नज़र
अनहोना ना देखे कुछ
फिर भी बेगाने "है" लोग बहुत |बढ़िया प्रस्तुति ....फिर भी बे -गाने "हैं "लोग ...अनुस्वार /अनुनासिक /बिंदु /चन्द्र बिंदु "है" लोग इसलिए हैं आयेगा ,बहु -वचन हैं लोग .
कृपया यहाँ भी पधारें -
ram ram bhai
शनिवार, 25 अगस्त 2012
आखिरकार सियाटिका से भी राहत मिल जाती है .घबराइये नहीं .
गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)
बेहद खूबसूरत रचना...
ReplyDeleteअब ये दो नयना भरे भरे से
ReplyDeleteएक विश्वास की डोर से
बंधे बंधे से
beautiful lines with emotions and feeligs.
स्वयं पर विश्वास हो तो कदम दृढ़ता से मंज़िल की ओर बढ़ते हैं .... सुंदर प्रस्तुति
ReplyDeleteअँधेरे की आहट ने
ReplyDeleteखोल दी हैं खिड़कियाँ
सूरज की किरणों से फैला उजाला है
नया सवेरा तुम्हारा है
आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 29/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!
ReplyDeleteआपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 29/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!
ReplyDeleteविश्वास की डोर से बंधे जीवन के पथ पर आगे बढ़ते जाना है..बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना...इक नई मंजिल की ओर
ReplyDeleteकदम बढ़े बढ़े से ||
beautiful composition with beautiful picture....
ReplyDeleteओह
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
क्या बात
bahut sundar kavita...positive thought kay saath.........
ReplyDeleteसुंदर अभिव्यक्ति....
ReplyDeleteबेहतरीन रचना
ReplyDeleteबेहतरीन रचना ....
ReplyDeleteबहुत ही खूब...
ReplyDeleteआपने मनोभाओं को बड़ी सहजता से बटोरकर एक शानदार रचना का रूप दिया हैं|
मेरा ब्लॉग आपके इंतजार में,समय मिलें तो बस एक झलक-"मन के कोने से..."
आभार...|
bahut hi prerak
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया।
ReplyDeleteसादर
बेहतरीन प्रस्तुति...
ReplyDeletebhawpoorn.....
ReplyDeletesundar rachanaa , achchhe bhaav
ReplyDeletebahut hi sundar rachana lagi anju ji ....sadar badhai sweekaren
ReplyDeleteमंजिलों की ओर अग्रसर रहें और सफलता पाते रहें..... शुभकामनाएं
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना
हां ,दूर कहीं एक आस
ReplyDeleteजगी जगी सी
उम्मीदों की किरणे हैं
फैली फैली सी
उसकी इक रोशनी मुझे
अपनी ओर खींचती हुई सी |
बहुत सुन्दर बात कही है आपने.तुम मुझको क्या दे पाओगे ?
हां ,दूर कहीं एक आस
ReplyDeleteजगी जगी सी
उम्मीदों की किरणे हैं
फैली फैली सी
उसकी इक रोशनी मुझे
अपनी ओर खींचती हुई सी |
बहुत सुन्दर बात कही है आपने.तुम मुझको क्या दे पाओगे ?
बहुत सुन्दर सृजन , सादर
ReplyDeleteपधारें मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" पर भी , आभारी होऊंगा .
कदम बढते रहना जरूरी है ... मंजिल पास आती जाती है ... मिल ही जाती है ... आशा का संचार है ये रचना ...
ReplyDeleteएक नई भोर की लाली
ReplyDeleteअभी अभी उभरी सी
इक नई मंजिल की ओर
कदम बढ़े बढ़े से ||
बेहतरीन रचना , प्रेरित करती हुई.
शुभकामनायें.
pahli baar aapke blog par aana hua bahut hi khoosurat rachna..
ReplyDeleteऔर ये कदम अनवरत बढ़ाते ही रहें ....!!
ReplyDeleteशुभकामनायें ....
bahut sunder rachna....
ReplyDeletebehtareen prastuti....
ReplyDeleteaabhar!!
अब ये दो नयना भरे भरे से
ReplyDeleteएक विश्वास की डोर से
बंधे बंधे से
एक नई भोर की लाली
अभी अभी उभरी सी
इक नई मंजिल की ओर
कदम बढ़े बढ़े से ||
sunder bhav badhai
rachana srivastava
anju ji bahut hi sundar rachana likhi hai apne sadar badhai .
ReplyDeleteआशा बंधाती हौसला दिलाती कविता ।
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