Friday, September 14, 2012

परी ...( ममतामयी माँ )


एक  परी आएगी

जो तुझे सुलाएगी
लेगी आँचल में वो अपने
तुझे पलकों के पालने में
         झुलाएगी ||
झूठ मूठ करना आँखे बंद
और करवटे बदलना
वो थपकी देगी
तुम सोने का नाटक करना
जब
वो कान्हा करके बुलाए 
तो .. जा  कर छिप जाना 
वो घर भर में शोर मचाएगी 
उसके सामने आते ही
तुम बुद्धू बन जाना
ऐसे ही वो तुझे लाड़ लड़ाएगी
इस ममता के आगे
तेरी कोई चालाकी काम
नहीं आएगी
तेरी इस अदा पर
वो रोम रोम से
पुलकित हो जाएगी
ज्यादा नहीं वो ,
पास बिठा तुझे
अपने ही हाथों से
फिर खाना खिलाएगी
हाँ ...झाँकना उसकी आँखों में
एक प्यार का निश्छल
सागर पाओगे  ||

हो तेरे जीवन में
काँटों सी उलझने  ,
पतझड़ से रूखे में
पानी के लहरों
सी जिंदगी में
परिचय की टहनी पर
टूटे सन्दर्भों के
जुड़ आयें छोरों पर
मन के भरीपन में
ममतामयी के कान्हा
तुम हर वक्त उसे अपने ही करीब पायोगे
जब हो मन में
मकड़ी से जालो का उलझाव
तो देना उसे बस ...एक हल्की सी आवाज़
वो कान्हा कान्हा कर
दौड़ी चली आएगी ........कि

एक  परी आएगी
जो रख कर सर तेरा
अपनी गोद में
बड़े प्यार से ...फिर से
जो तुझे सुलाएगी
लेगी आँचल में वो अपने
तुझे पलकों के पालने में
झुलाएगी ||




अंजु (अनु)

49 comments:

रश्मि प्रभा... said...

इस प्यारी परी को प्यार...जो इतना सुकून दे जाएगी

Mukesh Kumar Sinha said...

उस परी का इंतज़ार अब भी कभी कभी होता है.. जब नींद नहीं आती.. और कोई परेशानी घंटो मन में चलती रहती...
बहुत बेहतरीन... उम्दा... खुबसूरत सोच :)
हिंदी दिवस की शुभकामनायें

संतोष त्रिवेदी said...

अच्छा लगा बच्चा बनना ।

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

ज्यादा नहीं वो ,
पास बिठा तुझे
अपने ही हाथों से
फिर खाना खिलाएगी
हाँ ...झाँकना उसकी आँखों में
एक प्यार का निश्छल
सागर पायोगे ||


बहुत अच्छी रचना
बहुत सुंदर

yashoda agrawal said...

मनमोहक रचना
इसे सम्भवतः बुधवार को नई-पुरानी हलचल में ले जाउँगी

धीरेन्द्र अस्थाना said...

उत्तम रचना !
माँ के स्नेह की छाँव सदैव ऐसी ही होती है!

धीरेन्द्र अस्थाना said...

उत्तम रचना !
माँ के स्नेह की छाँव सदैव ऐसी ही होती है!

वन्दना said...

बहुत मनभावन रचना

expression said...

बहुत सुन्दर....
कोमल सी प्यारी सी रचना....
सस्नेह
अनु

दिगम्बर नासवा said...

माँ ही तो है वो परी ... जो हमेशा पलकों पे बिठाती है ... हर अदा को निहारती है ..
सुन्दर .. प्यारी सी रचना ...

RITU said...

बहुत सुन्दर !

संध्या शर्मा said...

सचमुच पलकों के पालने में झुलाने वाली ममता के आँचल में सुलाने वाली प्यारी सी परी है माँ... बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
हिंदी दिवस की शुभकामनाये...

Sadhana Vaid said...

माँ के ममत्व को बहुत ही मनभावन तरीके से अभिव्यक्ति दी है अनु जी ! बहुत ही प्यारी रचना ! माँ होती ही ऐसी है !

Arora Pawan said...

sundar dost ki sundar rachna

Arora Pawan said...

sundar dost ki sundar rachna

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

माँ के एहसास से सराबोर सुंदर रचना ..... पायोगे के स्थान पर पाओगे कर लें

Pallavi saxena said...

अनुपम भाव संयोजन के साथ बहुत ही सुंदर एवं मन भावन रचना....

Dr.vandana singh said...

पानी के लहरों
सी जिंदगी में
परिचय की टहनी पर
टूटे सन्दर्भों के
जुड़ आयें छोरों पर
मन के भरीपन में
ममतामयी के कान्हा
तुम हर वक्त उसे अपने ही करीब पायोगे
जब हो मन में
मकड़ी से जालो का उलझाव ....
इन शब्दों में समाई गहराई.... अद्भुत.... बहुत सुन्दर रचना...:)

चैतन्य शर्मा (Chaitanya Sharma) said...

सबसे प्यारी माँ ...परी सी माँ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

हिन्दीदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (15-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Vivek Rastogi said...

ममता, प्यार और माँ बहुत ही ताकतवर शब्द हैं, जो किसी भी कविता को नया आयाम दे देते हैं ।

Anju (Anu) Chaudhary said...

शुक्रिया संगीत दी ...ऐसे ही मार्ग दर्शन करती रहे ...आभार

shikha varshney said...

माँ ..परी सी ..वाह ..ख़याल रखना इस पारी का.

Reena Maurya said...

बहुत-बहुत सुन्दर, प्यारी रचना...
:-)

Amit Chandra said...

खुबसुरत, प्रभावी एवं ममतामयी रचना.

सादर.

Ramakant Singh said...

एक परी आएगी
जो रख कर सर तेरा
अपनी गोद में
बड़े प्यार से ...फिर से
जो तुझे सुलाएगी
लेगी आँचल में वो अपने
तुझे पलकों के पालने में
झुलाएगी ||

मन को झकझोरती मन के कोने को सहलाती भाव पूर्ण लाइन जिसमे ममता और बचपन खेलता है .

Amit Srivastava said...

ममता से भरपूर रचना |

Amit Srivastava said...

ममता से भरपूर रचना |

Maheshwari kaneri said...

वाह बहुत सुन्दर..ममतामयी प्यारी रचना.

Saras said...

वाकई ...माँ परी ही होती है ... बहुत प्यारी रचना ...माँ जैसी ...इश्वर यह परी किसीसे न छीने .....!

નીતા કોટેચા said...

kyaa bat hai..bachpan ki bate yaad aa gai.. bahut hi badhiya annu..

"अनंत" अरुन शर्मा said...

वाह क्या बात आपकी रचना मेरी ह्रदय को छू गयी

सदा said...

मन को छूते शब्‍द ... मां का स्‍नेह लिए हर भाव

Dr. sandhya tiwari said...

प्यारी सी रचना ...

इमरान अंसारी said...

बहुत सुन्दर ।

ANANT said...

Bahut sundar

Minakshi Pant said...

खूबसूरत अहसास से सजी सुन्दर रचना |

वाणी गीत said...

कान्हा औ परी सा रिश्ता बड़ा खूबसूरत है !
सुन्दर !

shashi purwar said...

waah bahut hi pyari si rachna :) ma pari hi to hoti hai

संजय भास्कर said...

....ममतामयी प्यारी रचना

संजय भास्कर said...

कोमल भावों से सजी ..
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति , बधाई.

कृपया मेरे ब्लॉग "प्रेम सरोवर" पर पधारकर मुझे प्रोत्साहित करें। धन्यवाद ।

मन के - मनके said...

’परिचय की टहनी पर
टूटे संदर्भों के-----
तुम हर वक्त उसे अपने ही करीब पाओग”
अहसासों के अतिरिक्त,जीवन की परिभाषा अधूरी है.
मातृत्व वह अहसास,जिस पर हर अहसास टिका है.
आपने इस अहसास को अपने काव्य में जी लिया.

नीरज गोस्वामी said...

वाह...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

एक परी आएगी
जो तुझे सुलाएगी
लेगी आँचल में वो अपने
तुझे पलकों के पालने में
झुलाएगी ||
बहुत सुन्दर, स्नेह में रची-बसी कविता है अनु जी. सचमुच माँ ऐसी ही होती है...एकदम पारी जैसी...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

परिचय की टहनी पर
टूटे सन्दर्भों के
जुड़ आयें छोरों पर
मन के भरीपन में

वाह !!!! अद्भुत कल्पना...

रंजना [रंजू भाटिया] said...

जब हो मन में
मकड़ी से जालो का उलझाव
तो देना उसे बस ...एक हल्की सी आवाज़ ..bilkul sahi ..bahut hi pyaari rachna hai ..

नादिर खान said...

bahut umda rachna.
apki maa ko apni beti per naaz hai.

Rashmi Garg said...

sunder