टिमटिमाती रोशनियाँ
और जंगल की आग का
धुआँ
सड़कों से गुजरती गाड़ियाँ
और इन सबका शोर
उसके कानों में
फुसफुसाता है
अपने व्यवस्ता की दास्तां
एक अजीब सा शोर
एक अजीब सी घुटन
उसकी आँखों में काँपती है
और फिर एक ऊँची आवाज़
ज़ार-ज़ार
खड़खड़ाती सी
उसे भेदती हुई
आर-पार हो जाती है
उसे अकेला कर देने के लिए
बस इतना ही काफी है ||
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अंजु चौधरी (अनु )
