Saturday, March 14, 2009

दो हंसो का जोड़ा......


दो हंसो का जोड़ा
निर्मल,पवित्र ,पाक सा
श्वेत, श्यामल स्वछ सा ..
चला है इस पार से उस पार..
अपने पशुत्व को जीत के
देने चला सबको प्यार का उपहार .......
दो हंसो का जोड़ा ........
देखो फिर बदली दिशा अपनी उसने
नियति से लेने टक्कर वो चला
बना के ,ज़माने को अपना दुश्मन
खुद का प्यार वो पाने चला .........
दो हंसो का जोड़ा ..............
बहते पानी को किसने है रोका ,
झूठी दुनिया के बाशिंदे ,
इस नफरत की आग में देखो ,
ली बलि ....
फिर से उन हंसो के जोड़े की
दो हंसो का जोड़ा .......
निर्मल,पवित्र ,पाक सा
श्वेत, श्यामल स्वछ सा .......
दे कर अपने प्यार का बलिदान
देखो वो ..अमर हो चला .......
दो हंसो का जोड़ा .........
(....कृति.....अनु.....)

3 comments:

Pintu said...

akal ke dushmano gadho ki dum
Hanso K Jodo Ko KOi Comment nAHI
kOI bAAT nAHI mAIN hu NAA pINTU puTTER
WASE KAHA SE LAYE IS JODE KO CUSTOM VIBHAG NE ROKYA NAHI TENU
O HANSI MERE SATH CHAL HANSNI
KHAWABO KI DUNIYA MEIN TU CHAL MERI HANSNI

PAR ANU TU HAS NAHI TU HAS NAHI

neera said...

वो दो हंसो का जोड़ा था ना इसलिए अमर हो गया....
इंसानों की दुनिया में क्या ...अब...इस टाइम संभव है....शायद नहीं..
niru

opyadav said...

haahannshon me pashuttav nahi raha,,,,achchi baat hai.....tere rahan shan ko jara sa nichaa karle/ab mujhse our nichaa nahi dekha jata....omprakash