Tuesday, August 17, 2010

बचपन


बचपन के वो दिन जो बहुत अच्छे थे ..जिसकी याद में हर व्यक्ति खुद को जीने लगता है कुछ यादे कभी भुलाये नहीं भूलती ॥बस उन्ही यादो को लिखने की चेष्टा की है


कोई लौटा दे मेरे बचपन के दिन ....
दे मुझे वोह खुला आसमान
जहाँ ना हो टेंशन का आगमन ..
मै भी जी लूँ मस्त बन कर ..
खेलू अपनी गुडियों पटोलो संग ,
वो मिट्टी की ज़मी ..वो रेत का टीला..
वो सावन का झूला मेरा
वो स्कूल का बस्ता...वो किताबो की मस्ती
वो माँ का डांटना और मेरा छिप जाना
फिर प्यार से माँ का पास बिठा के
मुझको खाना खिलाना
यहाँ है सिर्फ खुशियों के डेरा ,
जहाँ न है गृहस्थी का कोई बोझ
ना है अपनों की कोई रोक टोक ..
मै फिर से अपनी गुडिया का
विवाह..गुड्डे से रचा लूँ ..
संग सहेलियों के मै..
फिर से ठहाके लगा लूँ
एक बार फिर से अपने
पितःमाह..को है पाने की इच्छा ..
कोई लौटा दे मुझे ,
मेरे दुलार वाले दिन ..
जिसकी मै थी प्यारी गुडिया ..
काश !कोई मुझे उस से एक बार मिला दे ..
कोई लौटा दे मेरे बचपन के दिन ..............
(......कृति ...अंजु ....(अनु .....)

3 comments:

हमारीवाणी.कॉम said...

क्या आप "हमारीवाणी" के सदस्य हैं? हिंदी ब्लॉग संकलक "हमारीवाणी" में अपना ब्लॉग जोड़ने के लिए सदस्य होना आवश्यक है, सदस्यता ग्रहण करने के उपरान्त आप अपने ब्लॉग का पता (URL) "अपना ब्लाग सुझाये" पर चटका (click) लगा कर हमें भेज सकते हैं.

सदस्यता ग्रहण करने के लिए यहाँ चटका (click) लगाएं.

माधव said...

really nice

Mukesh Kumar Sinha said...

SABKO apne bachpan ke din sabse pyare hote hain........kassh wo din fir laut aata......:)

pyari rachna..........