Friday, May 24, 2013

यूँ ही


लेते ही नाम उसका
ख्याबों की ज़मी पर
उगते हैं इस दिल
के अरमां
जिसकी फसल
बोते ही
वहाँ कांटे ही कांटे
नज़र आते हैं ||

कांटो की
नुकीली चुभन की
अदा भी निराली
देखी
जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||

अंजु(अनु)

32 comments:

dinesh gautam said...

कांटो की
नुकीली चुभन की
अदा भी निराली
देखी
जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||
दिल में चुभने वाले कांटे ऐसे ही होते हैं अंजू जी! अनुभव की प्रामाणिकता इस रचना में दिखती है । अच्छी रचना।

Ramakant Singh said...

यही तो काँटों की खूबी है
बेहतरीन भावों की अभिव्यक्ति

Dr. Vandana Singh said...

जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||

वाह बहुत सुंदर ....

sadhana vaid said...

अरेवाह ! बहुत सुंदर ! यही प्यार की पराकाष्ठा है !

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुंदर...सच कहा.......जो,दर्द तो देते हैं पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर प्यारी रचना,,,

Recent post: जनता सबक सिखायेगी...

तुषार राज रस्तोगी said...

लाजवाब रचना | आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (25-05-2013) छडो जी, सानु की... वडे लोकां दियां वडी गल्लां....मुख्‍़तसर सी बात है.....
में "मयंक का कोना"
पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (25-05-2013) छडो जी, सानु की... वडे लोकां दियां वडी गल्लां....मुख्‍़तसर सी बात है..... में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Dr.NISHA MAHARANA said...

जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||bahut khoob ...sacchi bat ....

रश्मि प्रभा... said...

अपनों का साथ रहे तो मायूसी कैसी ! बहुत अपने साथ साथ हैं :)

Rajendra Kumar said...

कुछ दर्द बिना जख्म के ही सताते रहते हैं,बेहतरीन प्रस्तुति.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जख्म दिखते नहीं ...बहुत खूब

madhu singh said...

बेहतरीन भावों की अभिव्यक्ति

vandana gupta said...

जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं |……………यही तो इनकी फ़ितरत होती है

Rewa tibrewal said...

bahut khoob....bahut sundar shabd rachna

ranjana bhatia said...

जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं |waah bahut sahi ..bahut khub

Shanti Purohit said...

Bahut umda abhivyakti

ताऊ रामपुरिया said...

असली कांटों की यही तो सिफ़्त होती है, बहुत ही उम्दा.

रामराम.

Anita said...

काँटों में ही तो फूल खिलते हैं..सुंदर प्रस्तुति !

Mukesh Kumar Sinha said...

har jakhm aur dard nahi samajh aate :)

सतीश सक्सेना said...

दर्दीली अभिव्यक्ति...

bharadwajgwalior.blogspot.com said...

dard bhi kabhi kabhi meetha hota hai usake jakhm dikhate nahi hai.

मन्टू कुमार said...

Gahre Bhao...

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर

Prashant Suhano said...

सचमुच.. उसके दिए जख्म तो दिखते ही नहीं...

kavita verma said...

जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||
kya bat hai bahut sundar ...

दिगम्बर नासवा said...

अरमानों की फसल कांटो भरी ही होती है ... पर फूल तो उसमें भी उगते हैं ...
जख्मों को भुला दो ...

राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ........उम्दा पंक्तियां ............
कांटो की
नुकीली चुभन की
अदा भी निराली
देखी
जो,दर्द तो देते हैं
पर उसके दिए ज़ख्म
दिखते ही नहीं ||...............आप का मेरे ब्लॉग पर भी स्वागत है ......http://bikhareakshar.blogspot.in/

Arora Pawan said...

sundhar abhivykti

Kailash Sharma said...

बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...