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Tuesday, June 12, 2012

चाय का कप




चाय का कप
 
चाय का कप
जो पकड़ाया  तुमने
तो ..हाथ को छू गए
वो एहसास ...अंदर तक
जो है साथ होने का
साथ देने का
और प्यार से कहने का
अनु...लो चाय ..
हम साथ पीयेंगे   
बैठ कर यही
इस बालकोनी में .....
थी ठण्ड
पर महसूस नहीं हुई
तुम्हारे करीब आने से
या उस
चाय के आने से
कब दिया तुमने वो
प्याला मुझे?
कब मैंने उसे
पी डाला था  ?
तुम्हारी ही मदहोशी में
एक एहसास भर था
ठण्ड में
तुम साथ हो
पर ,तुम्हरे साथ ने
उस मदहोशी को
बरक़रार रखा
कब  ,तुम उठे
कब लेके आए  
दुशाल मेरा....
 फिर से मिला
नरम एहसास और
 स्पर्श तुम्हारा
तुम बोले
लो एक कप ओर चाय .............. ||
 
अनु