Tuesday, June 12, 2012

चाय का कप




चाय का कप
 
चाय का कप
जो पकड़ाया  तुमने
तो ..हाथ को छू गए
वो एहसास ...अंदर तक
जो है साथ होने का
साथ देने का
और प्यार से कहने का
अनु...लो चाय ..
हम साथ पीयेंगे   
बैठ कर यही
इस बालकोनी में .....
थी ठण्ड
पर महसूस नहीं हुई
तुम्हारे करीब आने से
या उस
चाय के आने से
कब दिया तुमने वो
प्याला मुझे?
कब मैंने उसे
पी डाला था  ?
तुम्हारी ही मदहोशी में
एक एहसास भर था
ठण्ड में
तुम साथ हो
पर ,तुम्हरे साथ ने
उस मदहोशी को
बरक़रार रखा
कब  ,तुम उठे
कब लेके आए  
दुशाल मेरा....
 फिर से मिला
नरम एहसास और
 स्पर्श तुम्हारा
तुम बोले
लो एक कप ओर चाय .............. ||
 
अनु 
 

46 comments:

दीपक बाबा said...

चाय का एक कप.

बेहतरीन कविता.

dheerendra said...

फिर से मिला
नरम एहसास और
स्पर्श तुम्हारा
तुम बोले
लो एक कप ओर चाय ...

वाह,,,, बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,बेहतरीन अहसासो भरी लाजबाब रचना,,,,,

MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: विचार,,,,

अमित श्रीवास्तव said...

वाह जी वाह ! ताजगी भरी चाय |

Dr. sandhya tiwari said...

bahut hi komal ehsas ka chitran

काजल कुमार Kajal Kumar said...

ओयहोय

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह! एहसासों से लबालब भरी कविता....
सुन्दर...
सादर.

shikha varshney said...

ओए होए ..क्या चाय है :)

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

कंवल पंखुड़ियों सा कोमल अहसास

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर,
इन एहसासों को वाकई शब्दों में ढालना आसान नहीं है, फिर भी आपने जिस तरह से इस अहसास को शब्द दिया है, काबिले तारीफ
बहुत बहुत शुभकामनाएं

Reena Maurya said...

वाह वाह वाह..
बहुत ही खुबसूरत...
कोमल सा अहसास है..
:-)

नीरज गोस्वामी said...

वाह...प्रेम में डूबी अद्भुत रचना...बधाई

नीरज

expression said...

इस चाय में तो नशा होगा पक्का..................
:-)

संध्या शर्मा said...

महसूस करने की बात है, देखिये एक कप चाय ने दिए कितने सुन्दर अहसास...

POOJA... said...

ek cup chai aur...
waah... chai se chai tak ki baat...

don kno much about such feelings, but yes can say they must be something superb...

अनुपमा पाठक said...

वाह!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

फिर से मिला
नरम एहसास और
स्पर्श तुम्हारा
तुम बोले
लो एक कप ओर चाय ....

बहुत कोमल एहसास को ले कर बुनी कविता ...

ओर चाय ... को "और चाय" कर लें

Vijay Kumar Sappatti said...

वाह ...एक अलग तरह की नयी सोच की नज़्म.. amazing thought flow . भई मान गये ..

रश्मि प्रभा... said...

चारों तरफ कुछ सर्द कुछ दुशाले सा लिपटा एहसास .... कोई नाम न दो

DINESH PAREEK said...

भावपूर्ण रचना क्या कहने...
बहुत ही सुन्दर..
भावविभोर करती रचना...

DINESH PAREEK said...

भावपूर्ण रचना क्या कहने...
बहुत ही सुन्दर..
भावविभोर करती रचना...

उपासना सियाग said...

achha chay aise bhi pee jati hai ....malum naa tha.........dil ko chhu gayee aapki kavita....

उपासना सियाग said...

bahut sundar kavita anu....chay aise bhi pee jati hai malum naa tha....

Khilesh Bharambe said...

कमाल की कविता है

हिन्दी दुनिया ब्लॉग (नया ब्लॉग)

सदा said...

अनुपम भाव लिए नाजुक सी कविता ... बेहतरीन

अरुन शर्मा said...

उम्दा खुबसूरत रचना
(अरुन =arunsblog.in)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह...
बहुत खूब!
अच्छी भावाभिव्यक्ति है।

kase kahun?by kavita verma said...

chai ki taajagi aur garmahat sundar ehsason ke sath..behad khoobsurat.

संजय भास्कर said...

अनु...लो चाय ..
हम साथ पीयेंगे
बैठ कर यही
इस बालकोनी में .....!
.....सच्चे दिल की चाहत ऐसी ही होती है . अति सुन्दर लिखा है !

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट कल 14/6/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा - 902 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

mridula pradhan said...

badi pyari si.....

Trupti Indraneel said...

बहुत सुन्दर गर्माहट भरी रचना ...अपनों का साथ हो चाय का प्याला हो फिर और क्या चाहिए

दिगम्बर नासवा said...

एक कप और चाय ...
इन शब्दों में जीवन का सुख सिमित आता है कभी कभी ... नर्म एहसास लिए ... खोबसूरत रचना ...

bhawna vardan said...

kaify azmi ka likha hua kuch yad aa gaya"jindgi nam hai khush lamho ka,jisme do bolti aankhe,
chay ki pyali se uthein,doob ke dil mein kahein,
aj tum kuch na kaho,aj mein kuch na kahoon, bus yunhi methe rahe.........

bhawna vardan said...

behtareen kavita.......

Kailash Sharma said...

कोमल अहसासों से परिपूर्ण बहुत प्यारी रचना...

मनोज कुमार said...

अनु जी कप के साथ-साथ चाय भी अच्छी थी। क्योंकि उसमें भावनाओं का शक्कर घुला था।

JHAROKHA said...

jivan bhar yahi ehsaas to hamaare rishto ko majboot banaye rakhte hain.
ek aahsas se paripurn komal v khoob surat antar man ki bhav -bhini prastuti
bahut hi sundar---
poonam

Suresh kumar said...

Bahut hi sundar ahsaas karati huyi khubsurat rachna....

M VERMA said...

थी ठण्ड
पर महसूस नहीं हुई
तुम्हारे करीब आने से

बहुत खूब .. यह एहसास भी निराला है

Asha Saxena said...

बेहतरीन रचना |
आशा

Anita said...

चाय का एक कप भी मन के भीतर प्यार के उपवन खिला जाता है जब भीतर प्यार हो तब हर अहसास दिल को छू जाता है...

रचना दीक्षित said...

चाय भी तभी अच्छी तभी लगती जब किसी अपने के साथ पी जाए.

खूबसूरत एहसास के साथ बहुत सुंदर कविता.

ताऊ रामपुरिया said...

प्रेम का अदभुत अहसास, शुभकामनाएं.

रामराम.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

चाय का एक कप.....गहन अनुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 21 -06-2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में .... कुछ जाने पहचाने तो कुछ नए चेहरे .

Noopur said...

Esi chai roz mil jaye to kya baat ho....