Sunday, January 22, 2012

शब्द और लिखना ...........अब ये ही जीवन हैं


(सबके साथ ... सांपला ब्लोगर मीटिंग के यादगार पल)


शब्द और लिखना ...........अब ये ही जीवन हैं



लिखना
उगना हैं एक विचार का ,
उगाना हैं ,शब्दों का
और इन दोनों के मेल से
अपने आप को
छिलने जैसा हैं
कि भीतर की हवा आर पार
हो सके
एक खिड़की तो निकल आए
मन की ताजगी के लिए
और मैं विचारों से ऊपर उठ जाऊं ...
शब्द ,
यौद्धा सी ताकत भरते हैं
मेरे मन में |

कोई नहीं पूजता यहाँ
धँसे हुए मस्तक को
मसल दिया जाता हैं
हर झुका हुआ सर
ऐसा कौन हैं जो ,
फूल की पलकें
काट कर बिछा देगा
आपके स्वागत के लिए |

पर
शब्दों और उनको लिखना
जैसे घने कोहरे से
सूरज का निकालना
हर पतझड़ अपनी राहें
खुद ही बदलती गई
कोमल पग धरते हुए
तूफानों की तरह ये आए हैं
मेरे इस सूने जीवन में ,
चट्टान सी छवि लिए
स्थापित हो गई
शब्दांश और रोशनी सी चकाचौंध की दुनिया में |

अनु

45 comments:

रश्मि प्रभा... said...

yahi raushni bani rahe...

अमित श्रीवास्तव said...

maarmik..

अमित श्रीवास्तव said...

nice and emotional..

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

man kee baat kahne ke do hee upaay hein
yaa to zubaan se kah do
naa bardaasht ho duniyaa se to munh par taalaa lagaa do
kalam ko khol do nirantar chalne do
man kee kunthaa jee bhar ke nikaal do
hanste hanste jeete raho

Maheshwari kaneri said...

जीवन ऐसे ही प्रेरित रहे..

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बढ़िया प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

"नेह्दूत" said...

कबिता उत्पन्न कही और होती हे,
शोभा कही अन्यत्र पाती हे.
कबि की लेखनी से सर्जित रचना शोभा बहा पाती हे ,
जहा उसके विचार , प्रसार तह उसमे कथित आदर्श का ग्रहण और अनुसरण होता हे.
yahi kaha ja sakta he ......

vidya said...

सुन्दर...
ये भावनाएं कायम रहें...
सादर.

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "धर्मवीर भारती" पर आपका सादर आमंत्रण है । धन्यवाद ।

नीरज गोस्वामी said...

आपकी रचना लाजवाब है...शब्द और भाव बेजोड़...वाह...

नीरज

dheerendra said...

बहुत सार्थक अभिव्यक्ति सुंदर रचना,
जीवन में ये खुशी के पल सबको नसीब हो,बधाई शुभकामनाए....
new post...वाह रे मंहगाई...

dheerendra said...

अंजू जी,मै पहले से ही आपका समर्थक गया हूँआप भी बने तो मुझे हार्दिक खुशी होगी,....

यशवन्त माथुर (Yashwant R B Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया।


सादर

Rakesh Kumar said...

सुन्दर प्रस्तुति.
सांपला में आपसे मिलकर अच्छा लगा.

RITU said...

वाह !..वाह !!..
kalamdaan.blogspot.com

संजय भास्कर said...

यादगार पल सदा याद आते हैं. सजीव चित्र.
ऐसे मिलने जुलने से विचारों को नए आयाम मिलते हैं, बहुत सुन्दर पहल

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सुंदर , प्रेरणादायी भाव.....

Dr.J.P.Tiwari said...

शब्दों का सम्प्रेषण तो
होता है अदृश्य अरूप.
भाव बोध दिलाते उसे संज्ञा
गद्य का, पद्य का, हास्य का
श्रृंगार - वियोग - वीरता का,
करुणा - विभत्स या रौद्र का.

शब्दों की अपनी मर्यादा
और उनकी उपयोगिता ही,
बढ़ाती और घटाती है,
व्यक्ति मान और सम्मान.
मिलती है उसी से -'जंजीर',
सोने की भी, लोहे की भी.

शब्द संयोजन, और
गरिमामय प्रस्तुति ही,
किसी ग्रन्थ को महनीय
और पूजनीय बना जाता,
किसी को नदी - नाले में,
जाने का कारण बन जाता.

शब्द तो हैं - अनमोल,
अमूल्य, ह्रदय कोश आगार.
जब भी निकले यह मुख के द्वार ,
कर लो फिर पुनः - पुनः विचार.
हो संगृहीत अर्थ, उसमे बस इतना,
हो आवश्यकता उनकी जब जितना.

Dr.J.P.Tiwari said...

शब्दों का सम्प्रेषण तो
होता है अदृश्य अरूप.
भाव बोध दिलाते उसे संज्ञा
गद्य का, पद्य का, हास्य का
श्रृंगार - वियोग - वीरता का,
करुणा - विभत्स या रौद्र का.

शब्दों की अपनी मर्यादा
और उनकी उपयोगिता ही,
बढ़ाती और घटाती है,
व्यक्ति मान और सम्मान.
मिलती है उसी से -'जंजीर',
सोने की भी, लोहे की भी.

शब्द संयोजन, और
गरिमामय प्रस्तुति ही,
किसी ग्रन्थ को महनीय
और पूजनीय बना जाता,
किसी को नदी - नाले में,
जाने का कारण बन जाता.

शब्द तो हैं - अनमोल,
अमूल्य, ह्रदय कोश आगार.
जब भी निकले यह मुख के द्वार ,
कर लो फिर पुनः - पुनः विचार.
हो संगृहीत अर्थ, उसमे बस इतना,
हो आवश्यकता उनकी जब जितना.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया!

Naveen Mani Tripathi said...

Anju ji behad prbhavshali rachana lagi ......yatharth ko awagat krati hui rachana bahut hi prernadayee lagi .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मन कि ताज़गी के लिए एक खिडकी तो निकल आये ... सही है ..सुन्दर प्रस्तुति

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर उनको शत शत नमन!

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर!

shikha varshney said...

कितने प्यारे अहसास...

veerubhai said...

कम ही पढ़ी बांची हैं इतनी सुन्दर प्रस्तुति .सुन्दर मनोहर अनुभूति सबकी बनती हुई पोस्ट .

mahendra verma said...

शब्द ही उर्जा है , ताकत है..!
प्रशंसनीय रचना।

નીતા કોટેચા said...

wahhhhhhhhhhh shabd ka sath mil jaye fir kya chahiye annu ekdam sahi kaha..

Jogendra Singh said...

▬● बहुत खूबसूरती से लिखा है आपने... शुभकामनायें...

दोस्त अगर समय मिले तो मेरी पोस्ट पर भ्रमन्तु हो जाइयेगा...
Meri Lekhani, Mere Vichar..
.

Ashwin said...

लिखना..उगना है एक विचार का...ये विचार अच्छा लगा मुझे..

sushma 'आहुति' said...

इशी आशा के साथ तो हम जिन्दगी जी जाते है..... प्रेरक और खुबसूरत रचना.....

Kailash Sharma said...

शब्दों और उनको लिखना
जैसे घने कोहरे से
सूरज का निकालना

....बहुत सटीक..बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति..

vikram7 said...

शब्दों और उनको लिखना
जैसे घने कोहरे से
सूरज का निकालना
बहुत सुन्दर कविता नीरज जी नें सही कहा''शब्द और भाव बेजोड़''

Urmi said...

सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा प्रस्तुती!

दिगम्बर नासवा said...

विचारों को उचित शब्द देना ही रचना है ...
सांपला की यादगार बहुत लाजवाब चित्रों में उतारी है आपने ...

डॉ. जेन्नी शबनम said...

bahut gahan anubhuti, gahri aur bhaavpurn rachna, badhai.

vikram7 said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
vikram7: कैसा,यह गणतंत्र हमारा.........

dinesh aggarwal said...

सराहनीय एवं प्रेरक....
कृपया इसे भी पढ़े-
क्या यह गणतंत्र है?
क्या यही गणतंत्र है

संतोष त्रिवेदी said...

शब्द निकलेंगे तो उद्गारों की खिडकी खुलेगी और कोई न कोई राह भी मिलेगी !

Kailash Sharma said...

गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें! जय हिन्द!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जीवन वैसा ही है जैसा हम देखते हैं इसे ...वाह जी बल्ले बल्ले.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

behtarin prastuti..sadar badhayee aaur amantran ke sath

SM said...

बहुत सुन्दर

NISHA MAHARANA said...

तूफानों की तरह ये आए हैं
मेरे इस सूने जीवन में ,
चट्टान सी छवि लिए
स्थापित हो गई.waah.....

गुड्डोदादी said...

कोमल पग धरते हुए
तूफानों की तरह ये आए हैं
मेरे इस सूने जीवन में ,
चट्टान सी छवि लिए

आसिरबाद
घनो चंगो लिक्खो