Wednesday, April 4, 2012

आज कल मैंने बहुत बिज़ी हूँ

आज कल मैंने बहुत बिज़ी हूँ 
किस काम में ?

जानना  चाहते हैं आप ..

तो पढ़िए ....(एक हास्य जो सच में रसोई में काम करते करते ये ख्याल आ गया ...कि अगर कभी कुछ ऐसा हो जाए तो ??...मेरा क्या होगा ???????  हा हा हा हा हा )


घर में हैं बच्चे
काम हैं ज्यादा ,
 सोचते सोचते ...दिमाग हैं गुल
 टेंशन हैं फुल  ...कि फेसबुक  पर क्या हो
रहा होगा धमाल .....
सारा का सारा दिमाग जो
ब्लॉग और नेट पर लगा हुआ था
तो खाना कैसे बनता स्वाद |
 पढ़ो अब आप भी ...
 लिख डाला ....लिख डाला मैंने भी
अपने जज्बातों को ...लिख डाला
कि कैसे हुआ  मेरा ये हाल ......

रसोई में सब्जी ,
सब्जी में नमक पड़ गया हैं
कुछ होलसेल में  ,
और  मिर्ची का तो हाल बुरा था
मिर्ची भी बोली मुझे से
ऐ !आंटी ...क्या घर वालो को
रुलाने और जलाने का हैं ईरादा  ........
दिमाग तो पहले गुल था 
जो आलू मटर की सब्जी को भी
गंगा जल जैसा बना डाला
बेचारे घर वाले उस जल में
चम्मच मार -मार मटर को ढूढं रहे थे
मैं खुद पर शर्मिंदा तो थी    ...ऊपर से
पति की डपट  अलग से खानी पड़ी 
कि  ..कहाँ हैं आज दिमाग तुम्हारा ,
बार  बार फेसबुक पर
बेकार में बतियाती हो ,
इस  चक्कर में ,
कभी दूध ,तो कभी रोटी जलती हो ,
इस से अच्छा तो पानी के संग
रोटी परोस देती ...''
बच्चे भी हो गए नाराज़ और
छोटा बोला बड़े सी ....भाई ,
आलू  तो डूबने से बच गया ..पर
मम्मी ...मटर का स्नान क्यूँ करवा लाई
तभी  ...
जेठानी ने गुस्से से देखा,
मैं  समझ गई कि ,अब
तो मेरी शामत आई
ऊपर से मेहमानों के आवागमन ने
परेशानी को ओर बढ़ाया
क्या करे अब ये कवयित्री बेचारी
करनी पड़ गई रसोई की
चाकरी सारी की सारी ...
 इस नेट के चक्कर में तो सब कुछ
गडबड हो चला रेरे रे रे ....
फिर  मैंने सोचा .....
कोई फायदा नहीं ..किसी तर्क वितर्क का
इस से अच्छा ...कट लो ,सुन लो सबकी
और मस्त हो कर ,फिर से
अपनी रसोई में जम लो ,
अगली लड़ाई के लिए ||

अनु


39 comments:

रविकर फैजाबादी said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति ।
बधाई स्वीकारें ।।

Rajneesh K Jha said...

मस्त मस्त :-)

http://www.liveaaryaavart.com/

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर

डा. अरुणा कपूर. said...

वाह!...मजा आ गया!

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर...मजा आगया अनु जी..

Deepak Shukla said...

Anu ji...

Antarjaal sabhi ko aise....
Apne Jaal main, uljhata hai...
Koi eski pakad main aata..
Tabhi samajh main aata hai...

Man main jab kavita ho samayi...
Sabji padti kahan dikhayi...
Shabd kabhi jab man main ramte..
Tab vichaar kahan hain thamte...

......so meri raay hai...

Khana jab be-swaad bane to...
Baatain lachchedaaar karen...
Chatni aur achaar sareekhe...
Vyanjan se thaali bhar den...

Agar kabhi koi kuchh kah de...
Ulta dosh madhen sar par...
Nahi padhayi '' Chef'' ki ki hai...
Ghar main main ghar ki afsar...

Bachche-bade agar kuchh kahte..
Jhanda aap bhi lahra den...
Apna kaam karo ab sab khud...
Sabko hi ye samjha den....

Sab khud theek ho jayenge....

......aap bhi aajma ke dekhiye meri ardhangini ka ye nuskha....:)...

Sadar...

Deepak Shukla...

sangita said...

भई मैं भी बिजी हूँ ,पर टिपण्णी तो देनी होग
मजा आगया आपकी पोस्ट पढ़ कर ।

expression said...

घर घर की कहानी...............

यहाँ भी बच्चों के इलज़ाम लगते हैं...कि आज माँ क्या कविता परोसोगी?????
:-)

बहुत बढ़िया प्रस्तुति अंजु जी.

सस्नेह
अनु

expression said...

घर घर की कहानी...............

यहाँ भी बच्चों के इलज़ाम लगते हैं...कि आज माँ क्या कविता परोसोगी?????
:-)

बहुत बढ़िया प्रस्तुति अंजु जी.

सस्नेह
अनु

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

:D:D:D:D:D:D

shikha varshney said...

:):)

sheetal said...

Anu ji
bahut hi acchi rachna lagi aapki.
aaj-kal net aur facebook ke chakkar
main yahi haal hota hain.
mera to yahi kehna hain...ek geet ki
panktiya likhti hun.
chahe koi gaaliyan hazaar de,
mast ram banke zindagi ke din
gujaar de...
bahut purana geet hain...shayad aapko
pata ho.
mere blog par bhi aaye
http://sheetalslittleworld.blogspot.com
http://kisseaurkahaniyonkiduniyaa.blogspot.com

रश्मि प्रभा... said...

कोई फायदा नहीं ..किसी तर्क वितर्क का
इस से अच्छा ...कट लो ,सुन लो सबकी
और मस्त हो कर ,फिर से
अपनी रसोई में जम लो ,
अगली लड़ाई के लिए ||
mazedaar

Vijay Kumar Sappatti said...

वाह
क्या बात है , इन्टरनेट पर सबका यही हाल है .. न घर के काम होते है और न ही ऑफिस के .. ऊपर से फेसबुक ने बचा हुआ वक्त भी ले लिया है .. बहुत सुन्दर हास्य रचना
बधाई स्वीकार करे

विजय

Kailash Sharma said...

वाह मज़ा आ गया...बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

बहुत खूब ... बधाई स्वीकार करें ...

dheerendra said...

जो भी नेट जुडा है उन सबका यही हाल है,चाहे महिला हो या पुरुष,२४ घंटे ध्यान कमप्यूटर पर बना रहता है,...
बहुत बढ़िया रचना,सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट,....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...

Udan Tashtari said...

हा हा!! बहुत बढ़िया...

નીતા કોટેચા said...

hehehe kya bat hai sab ke dard ko bakhubi samjti hai annu...kaun roye kaun chup karaye..sab ka yahi hal hai yaha.. khana banana to dur ki bat hai khana khane me vakt gavana bhi achcha nahi lag raha hai..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):) लगता है सभी गृहणियों को एक से ही ताने मिलते हैं :):)

बढ़िया हास्य

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

aaj bahut busy ho to koi baat nahee,
kal baat karenge

शिवम् मिश्रा said...

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - कब तक अस्तिनो में सांप पालते रहेंगे ?? - ब्लॉग बुलेटिन

हरकीरत ' हीर' said...

:))

अनु जी आपसे तो शिकायत है हमें ...हमने बात करने के लिए बुलाया आपको
और आप कब उठ कर चली गई पता ही नहीं चला .....
जाते समय कहा तक नहीं ..
और मैं समझती रही मिलते हैं न कार्यक्रम खत्म होने के बाद ....
आपने कविता बहुत अच्छी तरह पढ़ी थी ....

वन्दना said...

हा हा हा …………बहुत मज़ेदार अंजू :))))

संध्या शर्मा said...

कोई फायदा नहीं ..किसी तर्क वितर्क का
इस से अच्छा ...कट लो ,सुन लो सबकी
और मस्त हो कर ,फिर से
अपनी रसोई में जम लो ,
अगली लड़ाई के लिए ||
बिलकुल ठीक कहा है आपने... बहुत बढ़िया... :)

Saras said...

सही कहा अंजू जी ...हम सबका यही हाल है ...फूलों की लाली में दिखती है मिर्ची और सूरज का गोला बना पीसी हल्दी ........ बहुत सुन्दर अनुजी !

Pallavi said...

सभी औरतों का है यही हाल क्या करें बेचारे पति बेहाल ...मज़ेदार रचना ....

दिगम्बर नासवा said...

हा हा आपने तो पूरा लेखा जोखा दे दिया ... मज़ा आ गया पूरी रचना पढ़ के ... बहुत खूब ...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह जी! क्या बात है!!!
इसे भी देखें-
‘घर का न घाट का’

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह जी! क्या बात है!!!
इसे भी देखें-
‘घर का न घाट का’

मनोज कुमार said...

हा-हा-हा
इसकी रेसिपी को फ़ेस बुक पर अपलोड कर दीजिए।

क्षितिजा .... said...

आप अकेली एस श्रेणी मैं नहीं हैं ... हम भी आपके साथ हैं ... :D

KAVITA said...

bahut badiya kissagoi..
ghar ke kaam sath hi internet ki chinta mein bahut kuch gaflat hota hai.. yahi haal apna bhi hota rahta hai..
..

Mukesh Kumar Sinha said...

dikh raha hai, aap busy ho.. tabhi to matar ke saath aloo ki sabji banane ke badle snan karwa rahe ho:)
is mue internet ne kya kya na kar diya:d

प्रेम सरोवर said...

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

प्रेम सरोवर said...

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

boletobindas said...

हाहाहाहाहा....बेजोड़ .....हंसती रोटी ......मटर बेचारा..हाय रे ..

amrendra "amar" said...

sunder rachna

Naveen Mani Tripathi said...

lajbab prastuti anu ji ....badhai