वे
अपने लिए
नारी की
हरेक परत से
गुज़रना चाहते हैं
सकल पदार्थ
प्यार ,
अनुभूतियाँ ,
चमत्कार ,बाज़ार ,
सरंक्षण ,
सभी कुछ
अपनी सांसों में समेट
नारी की
नैसर्गिकता के
त्याग भाव से
चौंकते हैं
विभिन्न मुद्राओं ,
संदर्भों में ,
सीमाएं
निश्चित कर चर्चा
समारोह ,
समागमों से ,
नारी को
अपने में समेट लेना
चाहते हैं |
वे
अपने लिए .....|
(अनु)

( चित्र गुगल आभार से )
अपने लिए
नारी की
हरेक परत से
गुज़रना चाहते हैं
सकल पदार्थ
प्यार ,
अनुभूतियाँ ,
चमत्कार ,बाज़ार ,
सरंक्षण ,
सभी कुछ
अपनी सांसों में समेट
नारी की
नैसर्गिकता के
त्याग भाव से
चौंकते हैं
विभिन्न मुद्राओं ,
संदर्भों में ,
सीमाएं
निश्चित कर चर्चा
समारोह ,
समागमों से ,
नारी को
अपने में समेट लेना
चाहते हैं |
वे
अपने लिए .....|
(अनु)

( चित्र गुगल आभार से )
वाकई यही हो रहा है जिसे तुमने शब्दों में ढाल कर बयान कर दिया. बहुत सुंदर !
ReplyDeleteसुंदर अभिव्यक्ति। बड़े वो हैं वे ।
ReplyDeleteसुंदर अभिव्यक्ति।
ReplyDeleteनि:शब्द से शब्द.....!!
ReplyDeleteसच कहा जो करते हैं सिर्फ़ अपने लिये……सार्थक प्रस्तुति।
ReplyDeleteठीक कहा आपने ..
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteसच तो है .. सब कुछ ही ..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ..
अंतिम पंक्ति में वो कसक है जो आपने express करना चाहा है . " वे अपने लिये "
बहुत सही .
सदियों से यही होता आ रहा है, युग बदले लेकिन परिस्थितियां जस की तस हैं. गहन भाव... आभार
ReplyDeleteइच्छाओं की बात क्या, सदा रहे चौमास।
ReplyDeleteमुट्ठी में ना आ सका, लेकिन ये आकाश।
सुंदर रचना....
सादर।
वे .... !!! खुद के अस्तित्व के लिए नारी के अस्तित्व को समेट लेते हैं ... गंभीर अभिव्यक्ति
ReplyDeleteसच कहा.................
ReplyDeleteऔर उन्हें इसका एहसास भी नहीं........
:-(
अनु
sahmat nahi hoon....!! agar we aisa karte hain, to aapne bhi to wahi kiya...!
ReplyDeletewaise sahitiyak drishti se khubsurat...kuchh shabd khinch rahe hain... jaise सकल पदार्थ प्यार ,अनुभूतियाँ ,चमत्कार ,बाज़ार ,सरंक्षण !!
abhar!!
एकदम सही कहा है आपने....
ReplyDeleteहकीकत को शब्द दे दिया है आपने...
बहूत हि बेहतरीन रचना:-)
बिलकुल सच...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
ReplyDeletebahut achche ...bahut sahi kaha
ReplyDeleteexcellent thought..
ReplyDeleteहम पोस्टों को आंकते नहीं , बांटते भर हैं , सो आज भी बांटी हैं कुछ पोस्टें , एक आपकी भी है , लिंक पर चटका लगा दें आप पहुंच जाएंगे , आज की बुलेटिन पोस्ट पर
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति,सुंदर रचना,,,,,
ReplyDeleteRECENT POST ,,,, काव्यान्जलि ,,,, अकेलापन ,,,,
बिल्कुल सही कहा... सुंदर अभिव्यक्ति।
ReplyDeleteसटीक लिखा है ....नारी हमेशा ही भोग्या के रूप में ही रही है .
ReplyDeleteआधुनिक पुरुष-प्रवृत्ति पर कटाक्ष !
ReplyDeleteबहुत अच्छी रचना है
ReplyDeleteबहुत अच्छी रचना है
ReplyDeleteबहुत अच्छी प्रस्तुति!
ReplyDeleteइस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
सार्थक प्रस्तुति।
ReplyDeletevery true lines....sadiyon say aisa hi ho raha hai
ReplyDeleteसच्चाई बया करती प्रस्तुति ..
ReplyDeletewah.....unique
ReplyDeleteसंदेहाभिव्यक्ति।
ReplyDeleteबहुत सुंदर !
ReplyDeleteइस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - कहीं छुट्टियाँ ... छुट्टी न कर दें ... ज़रा गौर करें - ब्लॉग बुलेटिन
bahut achchi lagi.....
ReplyDeleteek talkh haqiqat ki khoobsurat alfaazo ke jariye khoobsurati se pesh kiya aapne , badhai ho
ReplyDeleteek talkh haqiqat ki khoobsurat alfaazo ke jariye khoobsurati se pesh kiya aapne , badhai ho
ReplyDeleteek talkh haqiqat ki khoobsurat alfaazo ke jariye khoobsurati se pesh kiya aapne , badhai ho
ReplyDeleteकैसी कलम है जो ये सब शब्दों में ढाल लेती है. सुंदर.
ReplyDeleteअब नारी में इतनी शक्ति है कि वो महज भोग्या ही न रहे ...
ReplyDeleteसुन्दर अभिव्यक्ति ..
satik abhiwayakti....
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