Monday, May 16, 2011

तेरे ही इंतज़ार में .....




तेरे ही इंतज़ार में

मंजिल दूर है क्या जो
वो आई नहीं अभी तक
दिल हमारा इंतज़ार और सब्र
करते करते पत्थर का हो गया

इस कदर सीना मेरा
इश्क से संलग्न हुआ
ना रहीं अब इस दिल में
कोई रंजिश उसके लिए

सामने जो पड़ गई वो
तो होश उड़ गए
ये सहोबत का असर है कि
यार मेरा भी ज़वा हो गया

दिखा के चेहरा -ए -रोशन
वो पूछते है हम से कि
भरी महफ़िल में भी
हम तन्हाँ से क्यूँ है

जानते है हम कि ये दिल
बेचैन क्यूँ है ...
मरना कबूल नहीं है मुझे
तेरे ही इंतज़ार में .....
(अनु)



24 comments:

Anonymous said...

good from PK Sharma

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर भाव
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

अनु बहन!
आपकी रचना बहुत सुन्दर और सशक्त है!
निरन्तर लिखतीं रहें!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ... सुन्दर अभिव्यक्ति

रश्मि प्रभा... said...

socha karti hun
kabhi tumko bhi hoga mera intzaar

vandan gupta said...

वाह ………बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

Amit Chandra said...

शानदार।

Minakshi Pant said...

भावनात्मक रचना |

मदन शर्मा said...

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ |
सभी कविताएं रोचक एवं बेजोड़|

वाह...किन शब्दों में इस अप्रतिम रचना की प्रशंशा करूँ...बेजोड़..
आपको मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं !

कृपया मेरे ब्लॉग पर आयें http://madanaryancom.blogspot.com/

उपेन्द्र नाथ said...

अनु जी, गहरे एहसास के साथ सुन्दर प्रस्तुति।

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत सुन्दर कविता और बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनायें!

राजीव तनेजा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति...

वाणी गीत said...

कुछ यादें भरी महफ़िल में तनहा कर जाती हैं !

36solutions said...

सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति. धन्‍यवाद.

Rajiv said...

"मरना कबूल नहीं मुझे तेरे इन्तजार में"
बात तो ऐसे होनी थी "हम इंतजार करेंगे तेरा क़यामत तक,खुदा करे कि क़यामत हो और तू आये".थोड़े से विद्रोही तेवर हैं"मंजिल दूर है क्या जो वो आई नहीं अभी तक".पर ताजगी भरा नयापन है इस कविता में.

Amrita Tanmay said...

ह्रदयश्पर्सी

Anju (Anu) Chaudhary said...

aap sabhi ki dil se shukriya...

Kunwar Kusumesh said...

इंतज़ार का भी एक मज़ा है अगर जिसका इंतज़ार किया जा रहा है वो कोई खास हो.किसी का एक शेर याद आ रहा है, देखिये:-

वादा किया था फिर भी न आये मज़ार पर.
हमने तो जान दे दी इसी ऐतबार पर.

Urmi said...

सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! बधाई !

अरुण चन्द्र रॉय said...

बहुत खूब ... सुन्दर अभिव्यक्ति .... गहरे एहसास के साथ शानदार रचना ....

मुकेश कुमार सिन्हा said...

wah re intzaar...:)
wah re man ke ahsaas...jo shabdo me utara hai aapne..:)

aisa bhi hota hai ki
ki bhari mahfil me tanha ho jate hain log..!!

SANDEEP PANWAR said...

मेरे ही इंतजार में,

Anju (Anu) Chaudhary said...

shukriya aap sabka ....dil se

Richa P Madhwani said...

http://shayaridays.blogspot.com