Monday, December 22, 2008

हाथो की महंदी ..............


हाथो की महंदी अभी
छुटी भी नहीं थी
आँखों मे सपने
जो सजे से थे
यू ही बीच
रस्ते मे टूट गए
दिल मे पले अरमान
भी जल गए
हम तो साथ मिल के
चले भी ना थे
हाथो को थामा था जिसने
सदा के लिए
वोह ही मेरा नसीब
आन्सुयो मे लिख
दुनिया से विदा ले
सदा के लिए चले गए ........................
...........(कृति.......अनु.....)

1 comment:

Pankaj said...

Hiiiiiiii Anu...bahot hi achaa likha hai aapne...ishe ek safal prayas kaha ja sakta hai jindgi ko kuch lines me sametne ki ek bejor kosis ki gayee hai...
Hope ki aap ish se bhi achaa likhoge